झांसी। अगर बुंदेलखंड की धरती पर हुए सियासी रण को गौर से जानेंगे तो पाएंगे कि अधिकांश सीटों पर मुकाबला कांटे का ही है। लड़ाई भी साइकिल और फूल के ही बीच रही। कुछ जगह बसपा ने भी ताकत दिखाई। अगर कांग्रेस की बात करेंगे तो एक दो सीट को छोड़कर यह पार्टी कोई खास कमाल नहीं कर पाई है। अगर राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस बार हार जीत का अंतर भी कोई बड़ा रहने वाला नहीं है। कुछ सीटों पर तो यह भी देखने को मिला कि वहां दोपहर तक किसी पार्टी की लहर रही लेकिन शाम होते- होते मतदाताओं का मन अचानक से बदल गया। इसका असर भी कहीं न कहीं देखने को जरूर मिलेगा।
यूं तो बुंदेलखंड में 7 जिले और 19 सीटें आती हैं। लेकिन 20 फरवरी को तीसरे चरण का चुनाव 13 सीटों पर हुआ है। इनमें झांसी-4, जालौन-3, ललितपुर-2, महोबा-2 और हमीरपुर की भी दो सीटों पर वोट पड़े। हम सबसे पहले बात करते हैं झांसी सदर सीट पर। यहां मुख्य मुकाबला भी भाजपा और सपा के बीच ही रहा। कई बूथों पर हमें बसपा भी मजबूत दिखाई दी। कांग्रेस ने भी यहां दम दिखाया लेकिन मुकाबले में नहीं मान सकते हैं। दूसरी सीट है बबीना। इस सीट पर दोपहर तक बसपा ने भी अपना दम दिखाया लेकिन शाम होते- होते यहां कई केंद्रों पर लड़ाई सपा और भाजपा के बीच ही आ गई थी। गरौठा विधानसभा सीट झांसी जनपद की सबसे संवेदनशील सीट मानी जाती है। यहां भी सपा और भाजपा के बीच ही जंग रही। दोनों प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है। मऊरानीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा अपना दल गठबंधन और सपा के बीच सियासी भिड़ंत हुई। हालांकि बसपा ने भी जोर भरा लेकिन लड़ाई में उस तरह से शामिल हो नहीं पाई। अब बात करते हैं ललितपुर की। अभी तक ललितपुर सदर और महरौनी सीट दोनों ही भाजपा के पास थीं। लेकिन अब यहां त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है। भाजपा, सपा और बसपा के बीच लड़ाई है। लेकिन इन दोनों विधानसभाओं के एक बड़े इलाके में सपा और भाजपा के बीच ही चुनाव माना जा रहा है। जालौन में दो सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला रहा जबकि उरई सदर सीट पर सपा और भाजपा ही मुकाबले में हैं। महोबा में बसपा भी ताकतवर रही है। यहां भी त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है। हमीरपुर में भी तस्वीर बहुत कुछ साफ नहीं है। यहां भी त्रिकोणीय मुकाबला मानकर चल रहे हैं। लेकिन तमाम मतदान केंद्रों पर सपा और भाजपा के बीच टक्कर देखने को मिली है।
इस बार नहीं बंटा मुस्लिम वोट,
झांसी। मुस्लिम वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए सपा के साथ ही बसपा और कांग्रेस ने भी पूरी ताकत लगाई थी। इन पार्टियों के प्रत्याशियों ने मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में जाकर खूब प्रचार किया। लेकिन मतदान के दिन बूथों पर वोटों का बंटवारा कहीं नजर नहीं आया। मुस्लिम बस्तियों के मतदान केंद्रों पर साइकिल ही चलती दिखी। खास बात यह है कि इन मतदान केंद्रों पर दूसरे बूथों की तुलना में वोटिंग का प्रतिशत भी ज्यादा रहा है। सपा का यह एक मजबूत पक्ष है। यहां बता दें कि झांसी जनपद में मुस्लिम वोटर 2 लाख के करीब हैं। सबसे ज्यादा झांसी विधानसभा में ही 80 हजार वोटर हैं। जबकि मऊरानीपुर में 60 हजार, गरौठा में 30 हजार और बबीना में भी इतने ही मुस्लिम मतदाता हैं। अ़ॉल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी कोई खास कमाल नहीं दिखा सके। उन्होंने यहां अपने प्रत्याशी उतारकर सभाएं भी कीं लेकिन उस तरह का असर पड़ा नहीं है। जानकारों का मानना है कि जिस तरह माना जा रहा था कि मुस्लिम वोट बंट जाएगा वैसा कुछ नहीं हुआ। यह स्थिति केवल झांसी की ही नहीं बल्कि पूरे बुंदेलखंड की मानी जा रही है।
झांसी। इस विधानसभा चुनाव में वोटों के बंटवारे ने सभी सियासी दलों की मुश्किलें बढ़ा दीं। झांसी व ललितपुर जिले की छहों सीटों पर विपक्ष ने भाजपा के परंपरागत वोटों पर निशाना साधा, तो वहीं भाजपा भी सपा, बसपा के वोटों में सेंध लगाने में कामयाब रही। वोटों के इस बंटवारे ने पक्ष-विपक्ष सभी का सियासी गणित उलझा दिया है।
झांसी सदर सीट पर कांग्रेस और बसपा ने भाजपा की तगड़ी घेराबंदी की। कांग्रेस ने ब्राह्मण और बसपा ने साहू समाज के प्रत्याशी मैदान में उतारकर भाजपा के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाई। वहीं, मतदान के नजदीक आते-आते बसपा के दलित वोट का एक बड़ा धड़ा भाजपा के झंडे के नीचे आ गया। सपा का भी यादव छोड़ अन्य पिछड़े वर्ग की कई जातियों का वोट भाजपा अपने पाले में लाने में कामयाब रही।
बबीना सीट पर भी बड़ा उलटफेर देखने को मिला। लोधी समाज भाजपा के परंपरागत वोटों में से एक है। यहां से बसपा ने लोधी समाज के उम्मीदवार पर दांव लगा दिया। लोधी समाज का एक बड़ा धड़ा हाथी पर सवार हो गया। भाजपा ने काफी हद तक इन नुकसान की भरपाई बसपा के परंपरागत दलित वोट को अपने पाले में लाकर की। इसके अलावा सपा के पिछड़े वर्ग के वोटरों पर भी निशाना साधा। यहां सपा ने भी बसपा वोटों पर अपनी पकड़ मजबूत की।
गरौठा सीट पर बसपा ने गुर्जर जाति का प्रत्याशी उतारकर भाजपा के परंपरागत माने जाने वाले गुर्जर वोटों में सेंधमारी की। कुर्मी समाज का प्रत्याशी उतारकर कांग्रेस ने भी भाजपा को चोट पहुंचाई। लेकिन, भाजपा यहां से बसपा के दलित और सपा के पिछड़े वर्ग की कई जातियों को अपने साथ खड़ा करने में कामयाब रही। जबकि, सपा भाजपा के परंपरागत ब्राह्मण वोटों पर डोरे डालती नजर आई।
मऊरानीपुर में ब्राह्मण वोटों का बड़ा धड़ा साइकिल के साथ हो लिया। इससे भाजपा के सहयोगी अपना दल के प्रत्याशी की मुश्किलें बढ़ीं, लेकिन अपना दल ने यहां बसपा के परंपरागत दलित वोट में जमकर सेंधमारी की।
उधर, ललितपुर में भी जातियों का वोट खूब इधर से उधर हुआ। ललितपुर सदर सीट पर सपा कुशवाहा समाज का प्रत्याशी उतारकर भाजपा का परंपरागत कुशवाहा वोट हासिल करने में काफी हद तक कामयाब रही। इतना ही नहीं क्षत्रिय प्रत्याशी को उतारकर बसपा ने भी भाजपा को चोट पहुंचाई। लेकिन, इसके जवाब में भाजपा ने अन्य पिछड़ा वर्ग पर अपनी पकड़ बनाई। वहीं, महरौनी विधानसभा से बसपा ने भाजपा का परंपरागत खटीक वोट झटका। तो वहीं सपा ने बसपा के रजक वोट को अपने पाले में लाने की कोशिश की। भाजपा ने भी बसपा के परंपरागत दलित वोट पर खूब चोट की।
वोटों के इस बंटवारे ने सियासी दलों को खूब उलझाया। एक-दो सीटों को छोड़कर शेष अन्य किसी भी सीट पर हार-जीत का अभी दावा नहीं किया जा सकता है।