अब तक कई मामलों में कराया जा चुका है समझौता
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। संचार क्रांति के दौरा में मोबाइल दूर के रिश्तों को जोड़ने का काम कर रहा है, तो वहीं ये पति-पत्नी के रिश्तों को तोड़ भी रहा है। पारिवारिक न्यायालय के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में ऐसे मामलों में दोनों पक्षों को समझा कर मामले को निस्तारित कराया जा रहा है।
पैरा-लीगल वालंटियर (पीएलवी) निकिता गौतम ने बताया कि मोबाइल को लेकर न्यायालय में कई मामले आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल पति-पत्नी के रिश्तों में दीवार बन रहा है।अधिवक्ता मुकेश सिंघल ने बताया कि पिछले माह करीब छह मामलों में समझौता करा चुके हैं और इस महीने भी मोबाइल को लेकर बन रहीं दूरियों के मामले सामने आए हैं।
न्यायालय ने अब तक कुल 160 वादों को निस्तारित कर वाद को समाप्त किया। इनमें न्यायालय ने 89 दंपतियों का घर टूटने से बचाया और दोनों की बीच के गिले शिकवे को दूर कर उन्हें एक कराया। इसके अलावा 71 विभिन्न मामलों में सुलह कराई है। एक जुलाई से अब तक 160 ऐसे मामले सामने आए जिसमें सुलह की गुंजाइश थी। ऐसे मामलों में दोनों पक्षों को बुलाकर उनकी काउंसिलिंग करा कर उनकी सहमति से वाद को निस्तारित किया। इनमें सबसे ज्यादा पारिवारिक और घरेलू वाद हैं। कई मामलों में मोबाइल भी विवाद का कारण था।
विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व न्यायाधीश शरद कुमार चौधरी ने बताया कि यह अभियान 30 सितंबर तक चलेगा। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता केंद्र आपसी संवाद और विश्वास का ऐसा मंच है, जहां पक्षकार अपने विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकाल सकते हैं। हमारा संकल्प है कि अधिक से अधिक मामलों का सौहार्दपूर्ण निस्तारण हो, जिससे लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास और प्रगाढ़ बने।