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मेडिकल कालेज का हाल: मरीजों की भरमार, इलाज के नाम पर घंटों का इंतजार

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झांसी। लोगों को सस्ता और सुलभ इलाज मुहैया कराने के लिए बने मेडिकल कॉलेज में इलाज का मतलब सिर्फ इंतजार है। मरीजों की यहां भरमार रहती है, लेकिन उनको इलाज देने में मेडिकल कॉलेज प्रशासन नाकाम है। ओपीडी में पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने और जांच कराने से लेकर अल्ट्रासाउंड कराने तक के लिए मरीजों को तमाम दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। कई-कई बार तो लाइन में लगे-लगे ही समय बीत जाता है और मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ता है। प्रदेश सरकार 16 जिलों में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी में है। मगर पहले से खुले मेडिकल कॉलेज में भी स्वास्थ्य सेवाएं हाशिए पर हैं। अमर उजाला टीम ने बुधवार को मेडिकल कॉलेज में मरीजों का हाल जाना, तो सबने यही कहा कि यहां इलाज का नाम है इंतजार...।
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पर्चा बनवाने के लिए लंबी लाइन
मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने के लिए सबसे पहले पर्चा बनवाना होता है। कॉलेज के मुख्य गेट के पास बने पंजीकरण केंद्र में मरीजों की कतार लगी रहती है। ओपीडी में 12 बजे तक पर्चे बनते हैं। लाइन इतनी लंबी होती है कि कई बार पूरा वक्त लाइनों में ही बीत जाता है। जालौन से आए शशांक ने बताया कि वह हड्डी रोग के इलाज के लिए एक दिन पहले ही झांसी आ गए थे। बुधवार को सुबह 11 बजे मेडिकल कॉलेज पहुंच गए, लेकिन 12 बजे तक पर्चे के लिए लाइन में लगे रहे।
चार घंटे खाली पेट अल्ट्रासाउंड के लिए इंतजार
मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड कराना भी मरीजों के लिए आफत है। सुबह नौ बजे से यहां पर भीड़-भाड़ शुरू हो जाती है। खासकर गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने में दिक्कत आती है। वह खाली पेट आती हैं और चार-चार घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। पृथ्वीपुर से आईं नेहा विश्वकर्मा ने बताया कि सुबह नौ बजे से अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आई हूं, लेकिन दोपहर 12.30 तक नंबर ही नहीं आया। जबकि एक दिन पहले नंबर लगाया था। खाली पेट बैठी हूं। गुमनावारा की संध्या ने कहा कि हालात बहुत खराब हैं। यहां तो इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।
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रिपोर्ट के लिए तीन दिन से लगा रहे चक्कर
खातीबाबा निवासी जीएन तिवारी को पैर में समस्या है। उनको डॉक्टर ने तीन दिन पहले एक्सरे के लिए कहा। एक्सरे कराने गए, तो कमरा बंद हो गया। दूसरे दिन फिर मेडिकल कॉलेज पहुंचे, तो एक्सरे हो गया। कहा गया कि रिपोर्ट अगले दिन ले जाना। तीसरे दिन फिर पहुंचे, तो भी रिपोर्ट नहीं मिली। उन्होंने बताया कि रोज आने में ही करीब 50 रुपये खर्च हो जाते हैं, इससे अच्छा बाहर दिखा लेता।
तीन बार बुलाया, फिर कहा दिल्ली ले जाओ
उरई निवासी श्याम सिंह की आंखों की रोशनी कम हो गई है। वे पिछले तीन दिन से मेडिकल कॉलेज में चक्कर काट रहे हैं। पत्नी का सहारा लेकर चलते हैं। तीन दिन तक डॉक्टर घुमाते रहे,फिर कह दिया कि यहां इलाज नहीं होगा दिल्ली ले जाओ। श्याम सिंह ने बताया कि उरई से आने में दिक्कत होती है। यहां इलाज नहीं मिल सकता था, तो डॉक्टर पहले दिन ही बता देते।
फाइल बन गई मगर भर्ती नहीं कर रहे
उन्नाव गेट निवासी राम देवी को ऑपरेशन कराना है। सर्जरी विभाग में डॉक्टर ने सोमवार को कहा था कि मंगलवार को आना भर्ती कर लेंगे। वे पहुंचीं, लेकिन रात तक इंतजार करने के बाद भी भर्ती नहीं किया गया। दिक्कत बढ़ती जा रही है। बुधवार को सुबह सात बजे शल्य चिकित्सा विभाग पहुंचीं, लेकिन दोपहर तक भर्ती नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि फाइल बन गई है, लेकिन भर्ती नहीं किया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज में पर्चा बनवाने, जांच कराने की व्यवस्था आनलाइन है। इसके जरिए ही मरीजों को नंबर जारी किए जाते हैं। भीड़ के चलते मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। इसके लिए भी व्यवस्था बनाई जा रही है। डॉक्टरों की कमी पूरी हो जाए, तो काफी हद तक मरीजों को राहत मिलेगी।
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डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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