झांसी। पहले से ही खून की कमी और बाद में प्रसव की वजह से अत्यधिक खून बह जाने (पीपीएच) से कई प्रसूताएं दम तोड़ दे रही हैं। झांसी में इस साल 44 प्रसूताओं की बच्चे को जन्म देने के 42 दिन के अंदर जान जा चुकी है। मंडल के तीनों जिलों में झांसी में मौत का आंकड़ा सबसे ज्यादा है।
झांसी समेत बुंदेलखंड में महिलाओं में खून की कमी पाई जाती है। नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-5 2020-21 में 15 से 49 साल की 35.7 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में खून की कमी की पुष्टि हुई। जबकि, सामान्यता 40 फीसदी महिलाएं एनिमिक मिलीं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन महिलाओं का हीमोग्लोबिन कम होता है और प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्त्राव हो जाता है तो फिर प्रसूता की जान जा सकती है। अधिकांश मामलों में भी यही कारण मौत की वजह बनता है। आंकड़े भी इस पर मुहर लगा रहे हैं। झांसी मंडल में इस साल 1.21 लाख में 4200 से अधिक गर्भवतियों में गंभीर रक्त अल्पता मिली। इनमें से 65 फीसदी महिलाओं ने ही अपना उपचार कराया। खास बात ये है कि झांसी में ललितपुर से डेढ़ हजार कम प्रसव होने के बावजूद दोगुनी मौतें हुई हैं।
जेएसवाई के ऑडिट में ये आंकड़े मिले
जिला सरकारी अस्पताल में प्रसव मौत
जालौन 14892 33
झांसी 16996 44
ललितपुर 18569 21
पूर्ण जांच में रुचि नहीं दिखातीं कई गर्भवती
गर्भावस्था के दौरान पूरी जांचें न कराना भी मातृ-मृत्यु का कारण बनता है। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2017-18 में 56696 गर्भवती पंजीकृत हुई थीं, इनमें से सिर्फ 28815 गर्भवती चार बार जांच कराने के लिए आईं। 2018-19 में 47914 गर्भवतियों के सापेक्ष 37233, वर्ष 2019-20 में 54373 की तुलना में 53357, वर्ष 2020-21 में 24541 के सापेक्ष 18125 गर्भवती ही पूर्ण जांच के लिए आईं।
सामान्यता बुंदेलखंड की महिलाओं का हीमोग्लोबिन कम रहता है। प्रसव के बाद कइयों की अत्यधिक रक्तस्त्राव के चलते मौत हो जाती है। इसलिए प्रसव से पहले संपूर्ण जांच करानी जरूरी है। इससे मौतों को रोका जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी लगातार समीक्षा करके इनके कारणों को खोजकर मौतों में कमी लाने में जुटे हैं। - आनंद चौबे, मंडलीय परियोजना प्रबंधक, एनएचएम।