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मंदिर-मस्जिद से पेश की गई अनूठी मिसाल... याद रहेगी साल ओ साल

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झांसी। गंगा-जमुनी तहजीब के शहर झांसी ने सांप्रदायिक सद्भाव की एक अनूठी मिसाल पेश की है। जहां एक ओर लाउडस्पीकर को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है वहीं यहां के एक पुजारी व इमाम ने स्वेच्छा से अपने मंदिर और मस्जिद से लाउडस्पीकर उतार दिए हैं। मंदिर के पुजारी और मस्जिद के इमाम का यह भाईचारा देखकर क्षेत्र के लोग इनकी मिसालें दे रहे हैं।
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सांप्रदायिक एकता और सद्भाव की विरासत को झांसी आज भी अपने में सहेजे हुए है। इसकी बानगी झांसी महानगर से सटे कस्बे बड़ागांव में देखने को मिली। यहां गांधी चौक पर रामजानकी मंदिर स्थित है और इसके पास ही में जामा मस्जिद है। मंदिर में सुबह और शाम आरती के दौरान लाउडस्पीकर बजते थे, जबकि मस्जिद में पांचों वक्त की नमाज के समय लाउडस्पीकर से अजान दी जाती थी। पिछले कई दशकों से यहां ऐसा होता आ रहा था।
उधर, धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है। इसी बीच इस मंदिर के महंत श्याम मोहन दास व मस्जिद के इमाम हाफिज मोहम्मद ताज आलम ने आगे बढ़ते हुए अपने-अपने धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटा लिए। अब मंदिर - मस्जिद में बगैर किसी शोर के नियमित रूप से अपनी-अपनी धार्मिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
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झांसी को विरासत में मिला सौहार्द
झांसी। सन् 1857 के संग्राम में झांसी में वीरांगना लक्ष्मीबाई की सेना में जहां एक ओर हर-हर महादेव के उद्घोष गूंजते थे, तो वहीं दूसरी ओर अल्लाह हू अकबर के नारे में गुंजायमान होते थे। मजहब अलग-अलग थे, लेकिन उद्देश्य सभी का एक झांसी को फिरंगियों से मुक्त कराना था। झांसी और रानी की खातिर सैकड़ों हिंदू मुस्लिमों सैनिकों ने हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। सांप्रदायिक एकता की ये परंपरा झांसी में आज भी कायम है।
आरती के समय मस्जिद का साउंड हो जाता है धीमा
झांसी। दतिया गेट बाहर हनुमान जी का प्राचीन मंदिर स्थित है। इसके पास ही मजिस्द-ए-अक्सा स्थित है। यहां भी दोनों समुदाय के लोग आपसी सौहार्द के साथ अपनी-अपनी परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे हैं। मंदिर में आरती के दौरान मस्जिद के साउंड की आवाज धीमी कर ली जाती है। जबकि, अजान के समय मंदिर में घंटे नहीं बजाए जाते हैं।
मंदिर में नियमित रूप से सुबह-शाम आरती और भजन-कीर्तन हो रहे हैं, लेकिन अब लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जा रहा है। शांति के साथ सभी धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं।
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- महंत श्याम मोहन दास
मस्जिद में पिछले कई सालों से दो लाउडस्पीकर लगे हुए थे, जिन्हें उतार दिया गया है। पांचों वक्त की नमाज अब लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किए बगैर की जा रही है।
- हाफिज मोहम्मद ताज आलम
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