फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मंडी परिषद को चपत लगा रहे उसके ही रखवाले!

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद को उसके ही रखवाले चपत लगाने पर आमादा हो गए हैं। आरोप है कि झांसी में मऊरानीपुर के रतौसा में हाट निर्माण के टेंडर को मानकों से काफी कम दरों पर स्वीकृत करने के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। जिससे मंडी परिषद को बड़ा आर्थिक नुकसान होना तय है। मामले की शिकायत राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक से की गई है। आरोप है कि परिषद के बड़े ओहदेदारों द्वारा निजी स्वार्थ और फर्म विशेष को लाभ पहुंचाने की गरज से ऐसा
विज्ञापन

किया जा रहा है। इस दौरान नियमों को बला ए ताक रखा जा रहा है। उधर, इस मामले में उपनिदेशक मंडी निर्माण पंकज गुप्ता का कहना है कि रतौसा हाट निर्माण के लिए तकनीकी कमी के कारण पहला टेंडर निरस्त हुआ था, तभी दूसरी बार कराया गया। अभी टेंडर का आवंटन नहीं हुआ है। मुख्यालय को भेजा गया है। वहां से ही फैसला होगा। टेंडर में नियमों का पालन किया गया है।
मऊरानीपुर के रतौसा निवासी शिकायतकर्ता इंदू यादव का आरोप है कि कई निविदाओं में जिनकी दरें पहली बार बिल ऑफ क्वांटिटी से काफी कम पर प्राप्त होती हैं, उन्हें निरस्त कर दूसरी या तीसरी बार में कम न्यूनतम दरों पर प्राप्त होने वाली निविदा की स्वीकृति प्रदान कर दी जाती है। हाटपैठ रतैसा में निर्माण कार्य के लिए प्राप्त निविदा उच्च निविदा समिति के सामने पेश की गई थी। मंडी परिषद मुख्यालय के अनुुसार पूर्व में उक्त कार्य की दिनांक को आमंत्रित झांसी के पक्ष में निविदा की
विज्ञापन

लागत 19.75 प्रतिशत कम दरों पर प्राप्त हुई थी। जिसे चौथे न्यूनतम निविदा दाता के नाम से निविदा अपलोड की गई थी। लेकिन बिल ऑफ क्वांटिटी (एक तय प्रक्रिया) दूसरे के नाम से अपलोड होने के कारण उच्च निविदा समिति ने निविदा निरस्त कर दी। यह कार्य अनियमितता के घेरे में है। इसकी जांच कराना जरूरी था लेकिन मात्र निविदा निरस्त कर इतिश्री कर ली गई।
वहीं, दूसरी ओर उपनिदेशक निर्माण ने स्वीकृति के लिए पेश निविदा पूर्व के निविदा दाता के पक्ष में पूर्व दरों 19.75 प्रतिशत कम के मुकाबले मात्र 0.35 प्रतिशत कम दरों पर प्राप्त होने के कारण व दरों में असमानता होने के चलते उच्च निविदा समिति द्वारा निर्णय लिया गया कि फर्म से नेगोसिएशन करा लिया जाए। इसके बाद उप निदेशक निर्माण द्वारा छह मई को निकाले गए पत्र में कहा कि फर्म को दरों में नेगोसिएशन करने के लिए पत्र लिखा गया है, जिसके क्रम में फर्म द्वारा विभागीय दरों से
तीन प्रतिशत कम पर कार्य करने की सहमति जता दी गई। आरोप लगाया गया कि पत्र में सिर्फ सूचित करना लिखा गया है, संस्तुति नहीं की गई है। पत्र में कहा गया कि शासनादेश में स्पष्ट है कि निविदादाता से कोई भी नेगोशिएशन न किया जाए। शिकायतकर्ता ने इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें