झांसी। मलेरिया विभाग कर्मचारियों की जबरदस्त कमी से जूझ रहा है। हाल ये है कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से लेकर फील्ड वर्कर तक के लगभग 80 फीसदी पद खाली पड़े हैं। ऐसे में मलेरिया के खिलाफ कैसे विभाग मजबूती से लड़ाई लड़े? साल दर साल कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने से जांचों की संख्या कम होती जा रही है। इस कारण सरकारी आंकड़ों में भी मरीज घट रहे हैं।
एक से डेढ़ दशक पहले मलेरिया विभाग के कर्मचारी अधिकांश गली-मुहल्लों में दवाओं का छिड़काव करते नजर आते थे। मगर कर्मचारियों की लगातार घट रही संख्या की वजह से अब उन क्षेत्रों में भी छिड़काव बमुश्किल हो पाता है, जहां मरीज सामने आते हैं। बताया गया कि विभाग में करीब एक दशक से कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई है। जबकि, साल दर साल कर्मचारी सेवानिवृत्त होते जा रहे हैं। सबसे ज्यादा कमी दवा का छिड़काव करने वाले फील्ड वर्कर की हो गई है। विभाग में फील्ड वर्कर के 42 पद हैं, जिनमें सिर्फ सात कार्यरत हैं। इसी प्रकार, 14 सुपीरियर फील्ड वर्कर में तीन ही तैनात हैं। वहीं, स्लाइड बनाने वाले 115 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं में 24 ही कार्यरत हैं। ऐसे में पिछले चार सालों में स्लाइड की संख्या घटकर 50 प्रतिशत रह गई है। जब स्लाइड ही कम बन रही है तो सरकारी आंकड़ों में मरीजों की संख्या घटना भी स्वाभाविक है।
ये हैं आंकड़े
वर्ष स्लाइड रोगी
2018 83607 267
2019 85398 152
2020 30897 38
2021 39703 17
ये हैं लक्षण
- तेज बुखार आना
- कंपकंपी होना
- बुखार उतरने के बाद पसीना आना
- तेज सिरदर्द होना
ऐसे करें बचाव
- मच्छरदानी में सोएं
- जलभराव न होने दें
- फुल आस्तीन के कपड़े पहनें
- हर हफ्ते कूलर, फ्रिज का पानी बदलें
- बिना प्रयोग वाले बर्तन को छतों से हटाएं
शासन ने रिक्त कर्मचारियों का ब्योरा मांगा है। पूरी डिटेल भेज दी गई है। जल्द ही कर्मचारियों की नियुक्ति होने की संभावना है। झांसी में पानी का जमाव न होने से भी मलेरिया के केस घट रहे हैं। - आरके गुप्ता, जिला मलेरिया अधिकारी।