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महानगरों में प्रदूषण के बीच बुंदेलखंड में राहत की बयार

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देश के अन्य प्रदूषित शहरों की तुलना में बुंदेलखंड के जिलों में कम प्रदूषण है। - फोटो : ???? ????
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महानगरों में प्रदूषण के बीच बुंदेलखंड में राहत की बयार
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झांसी। देश की राजधानी, महानगर और उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख नगरों में इन दिनों जहरीली हवा ने लोगों का सांस लेना दूभर कर दिया है। वहीं, झांसी समेत बुंदेलखंड के लगभग सभी जिलों में हाल बेहतर हैं। अन्य प्रदूषित शहरों की तुलना में बुंदेलखंड में प्रदूषण एक तिहाई से कम है। पर्यावरणविदों का कहना है कि इस संतुलन को बनाए रखने की जरूरत है। यह एक चुनौती है और झांसी जैसे महानगर के लिए बेहतर जीवनशैली का देश भर में रोल मॉडल बनने का अवसर भी।
एनसीआर समेत उत्तर प्रदेश के कई शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण ने जीवन नरक कर दिया है। पिछले चार दिनों से ये इलाके जहरीली हवा के चैंबर बनते जा रहे हैं। इनका वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़कर 450 के आसपास जा पहुंचा है। दिवाली तक हालात और बिगड़ने के आसार हैं। पराली जलने के साथ ही पटाखों से प्रदूषण का खतरा मंडरा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी), पर्यावरण से जुड़ी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं की चेतावनी के बावजूद हालात नियंत्रण से बाहर हैं।
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इस सबके बावजूद तुलनात्मक रूप से बुंदेलखंड के हालात बहुत बेहतर हैं। वैसे हवा में प्रदूषण यहां भी बढ़ रहा है। सवा सौ के आसपास रहने वाला झांसी का एक्यूआई रविवार को बढ़कर 160 पहुंच गया। फिर भी हालात बहुत हद तक नियंत्रण में हैं। इस पर इतराने की नहीं, वायु प्रदूषण के स्तर को बनाए रखने और कम करने की जरूरत है।
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इसीलिए शादी व पार्टी के लिए ओरछा आते लोग: डॉ.विनीत कुमार
पर्यावरणविद और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.विनीत कुमार के अनुसार यहां महानगरीय जीवनशैली का हर दबाव है। इसके बावजूद यहां आगरा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, लखनऊ जैसे प्रदेश के अन्य शहरों जैसे हालात नहीं हैं। वहां एक्यूआई 400 से 450 तक पहुंच गया है। वहीं झांसी में यह 150 के आसपास है। ललितपुर में वन क्षेत्र अधिक है इसलिए वहां स्थिति और बेहतर है। लगभग पूरे बुंदेलखंड में स्थिति बेहतर है। क्योंकि यहां लोगों में विकास की होड़ नहीं है। गगनचुंबी इमारतों में शान ढूंढने, पेड़ों और जंगलों को काटने की ललक नहीं है। यही कारण है कि बड़े-बड़े सेमिनार, थीम वेडिंग के लिए देश के नामचीन सात सितारा होटल को छोड़ लोग बुंदेलखंड के ओरछा आते हैं। यही मौका है पूरे बुंदेलखंड के प्राकृतिक स्वरूप की छाप छोड़ने और इसके स्वरूप को बचाकर रखने का।
बुंदेलखंड में एक्यूआई
झांसी 160
ललितपुर 130
महोबा 145
हमीरपुर 140
बांदा 162
(नोट: इन दिनों, आम तौर पर और कम रहता है)
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