झांसी। रेलवे में कार्यरत एक लोको पायलट (ड्राइवर) की पत्नी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अपने बच्चों के साथ इच्छा मृत्यु की मांग की है। पति के किनारा करने के बाद से रेलवे आवास में रह रही महिला का अपने बेटों के साथ रहना मुहाल बना हुआ है। उन पर आवास को खाली करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
रेलवे में कार्यरत एक लोको पायलट के नाम पश्चिमी रेलवे कॉलोनी में वर्कशाप प्रेमनगर मोड़ के पास आरबी थर्ड डी 377 आवास आवंटित है। वे इस घर में पत्नी दीक्षा साजनानी व दो बेटों गौरव (14) और मानव (08) के साथ रहते हैं। लोको पायलट का फरवरी 2018 में पत्नी से विवाद हो गया। इसके बाद से वे अलग रह रहे हैं। रेलवे आवास में पत्नी व बेटे रह रहे हैं। पत्नी दीक्षा का आरोप है उनके पति उनके साथ अमानवीय व्यवहार करते थे। उनका न्यायालय में मामला विचाराधीन है। मगर, नई कोच फैक्ट्री के चलते उनका आवास तोड़ा जाना है। आवास खाली करने के लिए उन पर आए दिन दबाव बनाया जा रहा है। कई बार उनके घर की बिजली और नल का कनेक्शन काट दिया गया। उनके लिए बेटों के साथ एक- एक दिन काटना मुश्किल हो गया है। वे डीआरएम समेत कई उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर मांग कर चुकी हैं कि वे उनके पति को आवास खाली कराने के लिए कहे, ताकि उनको परिवार का दूसरी जगह रहने का इंतजाम करना पड़ा। रेल प्रशासन कर्मचारी के परिवार की सुरक्षा करने से बच रहा है। उनका मायका भी छत्तीसगढ़ में है, इस कारण उनके परिवार के लोग भी उनकी मदद नहीं कर पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में वे अपने बेटों को लेकर कहा जाएं। आर्थिक तंगी भी है। इस कारण राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की है।