झांसी। झांसी में कुछ निजी अस्पतालों को छोड़ दें तो ज्यादातर से मरीजों का भरोसा लगातार कम होता जा रहा है। इसी वजह से इलाज के लिए झांसी के मरीज दूसरे शहरों का रुख करते हैं। कोविड के दौर में भी अन्य बीमारियों के उपचार के लिए मरीज नोएडा, गुरुग्राम, दिल्ली, ग्वालियर, लखनऊ जा रहे हैं।
झांसी में लगभग सवा सौ निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। इसके अलावा चंद कमरों में चलने वाले कई नर्सिंगहोमों ने तो पंजीकरण ही नहीं कराया है। यहां पर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने का काम किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के लचर रवैये की वजह से अनाधिकृत अस्पतालों पर कार्रवाई नहीं होती है। चूंकि, ज्यादातर अस्पताल महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित हैं, ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को वे अपने यहां लाने के प्रयास में लगे रहते हैं। इसके लिए बाकायदा दलाल भी छोड़ रखे हैं।
साथ ही, ऑटो चालकों को बतौर एजेंट सक्रिय कर रखा है। गांव-देहात के मरीज इन नर्सिंगहोमों के टारगेट पर रहते हैं। कम पढ़े लिखे मरीजों से यह मनमाना पैसा वसूलते हैं। कई मरीज तो अनाधिकृत नर्सिंगहोमों के चक्कर में पड़ जाते हैं, जिससे उनकी जान के लाले पड़ जाते हैं। जान बचाने के लिए मरीजों को दूसरे शहरों को भागना पड़ता है। वहीं, कई नर्सिंगहोम संचालकों ने अपने अस्पताल के बाहर सुपर स्पेशियलिटी से लेकर रिसर्च सेंटर तक के बोर्ड लगा रखे हैं। कुछ को छोड़ दें तो ज्यादातर नर्सिंगहोमों में इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाएं भी नहीं है। इन्हीं सब लचर सुविधाओं के कारण कई अस्पतालों से झांसी के मरीजों का भरोसा उठ सा गया है।
रोजाना सौ मरीज जाते बाहर
एक अनुमान के मुताबिक झांसी से रोजाना सौ मरीज दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, लखनऊ, कानपुर, ग्वालियर, भोपाल, इंदौर आदि महानगरों में इलाज कराने के लिए जाते हैं। इनमें कई मरीज सरकारी अस्पतालों से भी रेफर किए हुए होते हैं।
ऑपरेशन के लिए पहली पसंद ग्वालियर
ऑपरेशन के नाम से ही किसी भी मरीज की रुह कांप उठती है। ऐसे में वह भरोसेमंद अस्पताल में ही अपना उपचार कराना पसंद करता है। नजदीक होने के कारण ऑपरेशन के लिए झांसी के मरीजों की पहली पसंद ग्वालियर है। इसके बाद वह दिल्ली जाते हैं।
ये है स्थिति
निजी अस्पताल : 120
प्राइवेट डॉक्टर : 400
उच्च वर्ग के मरीजों ने कभी भी झांसी में उपचार कराया ही नहीं। वह हमेशा दिल्ली, नोएडा या अन्य शहर जाते रहे। वहीं, मध्यम और निम्न वर्ग के मरीजों का भरोसा झांसी के अस्पतालों पर कायम है। बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र के मद्देनजर झांसी के अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं हैं। पिछले दो सालों में आईसीयू की सुविधा बढ़ी है। इससे लोगों की जान बचाने में काफी कामयाबी मिली है।
- निलय जैन, सचिव, नर्सिंगहोम एसोसिएशन, झांसी।