झांसी। राजकीय संग्रहालय में दस दिवसीय चितेरी टेराकोटा कार्यशाला के दूसरे दिन मिट्टी के बर्तनों पर नक्काशी की विधियों के बारे में बताया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को पारंपरिक टेराकोटा कला में दक्ष बनाना तथा उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करना है।
प्रशिक्षक नीलम सारंगी ने कार्यशाला में प्रतिभागियों को टेराकोटा बर्तनों पर स्क्रैचिंग (नक्काशी) की विधियों का अभ्यास कराया। इसके साथ ही उन्हें यह भी बताया गया कि कैसे वे अपने हस्तनिर्मित उत्पादों को बाजार में बेच सकते हैं। तमाम ऑनलाइन और ऑफलाइन प्लेटफॉर्म (जैसे ई-कॉमर्स वेबसाइट्स, मेलों, हस्तशिल्प बाजार आदि) के जरिये अपनी बिक्री को बढ़ा सकते हैं।कार्यशाला में स्थानीय कलाकारों, छात्रों एवं हस्तशिल्प में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी रही। संवाद