झांसी। महानगर के प्रमुख पर्यटन स्थल लक्ष्मी तालाब में जल्द डुबकी लगाई जा सकेगी। तालाब में गिरने वाले नालों के पानी को साफ करने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तैयार हो गया है। इसका ट्रायल रन होने के बाद अब हरी झंडी मिलने का इंतजार किया जा रहा है। हरी झंडी मिलते ही तालाब में 50 लाख लीटर पानी भरा जाएगा। मौजूदा समय में तालाब में विकास कार्य होने के चलते प्लांट शुरू नहीं किया गया है।
लक्ष्मी तालाब सड़क के दूसरी ओर नारायण बाग की तरफ डडियापुरा में ट्रीटमेंट प्लांट बनाया है। लक्ष्मी ताल में गिरने वाले आसपास के सात नलों के गंदे पानी को सीधे प्लांट में ले जाकर प्रतिदिन 26 एमएलडी पानी का शुद्धीकरण होगा। इसमें से 22 एमएलडी पानी 10 बीओडी (बायो केमिकल ऑक्सीजन) तक शुद्ध किया जाएगा। यहां से पानी को नारायण बाग से होकर जाने वाले नाले से पहूंज नदी में छोड़ा जाएगा। जबकि, शेष चार एमएलडी (40 लाख लीटर) पानी का और अधिक शुद्धीकरण करके चार बीओडी (नहाने योग्य) किया जाएगा और यह पानी लक्ष्मी तालाब में छोड़ा जाएगा। पानी में फिटकरी और केमिकल भी डाले जाएंगे, जिससे जलकुंभी पैदा नहीं होगी। तालाब भरा रहने से आसपास का भूजल स्तर भी रीचार्ज होगा और गंदगी साफ हो जाने से बदबू नहीं आएगी। प्लांट अगले 15 साल (वर्ष 2035 तक) के लिए तैयार किया गया है, ताकि पानी की खपत बढ़ने के बाद नालियों में आने वाले पानी को फिल्टर किया जा सके।
बढ़ती गई पानी की जरूरत
महानगर में वर्ष 1967 में 45 एमएलडी पानी की खपत थी। इसमें भी पचास प्रतिशत पानी सेना के लिए उपयोग किया जाता था। लेकिन, धीरे- धीरे शहर का विकास हुआ तो पानी की जरूरत बढ़ गई और अब पानी की आवश्यकता 78.51 एमएलडी की है, जबकि पानी की उपलब्धता 65.47 एमएलडी है।
गढ़मऊ तक जाता है पानी
पुराने शहर की नालियों का गंदा पानी लक्ष्मी तालाब में जाता है। इससे तालाब का पानी गंदा हो गया था। पहले तालाब जब ओवरफ्लो हो जाता था, तब पानी नारायण बाग से होते हुए गढ़मऊ, मुस्तरा और चिरगांव के किनारे नाले से बहता हुआ बेतवा नदी में पहुंचता था। लेकिन, अब गढ़मऊ तक पानी जाता है।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार है। लक्ष्मी तालाब में सौंदर्यीकरण के काम चल रहे हैं, इस कारण यह बता पाना मुश्किल है कि कब तक तालाब को भरा जाएगा।
- आरके गुप्ता, सहायक अभियंता, जल निगम