इसमें उन्होंने सोशल मीडिया की और यूट्यूब की मदद लेते हुए आधुनिक खेती के तौर-तरीके सीखे। शुरुआत में उन्होंने अपने पॉली हाउस में बीजरहित खीरे की खेती की। जिसमें उन्हें अच्छा मुनाफा मिला। इसके बाद एक एकड़ में बने पॉली हाउस में स्वीट कॉर्न, रंगीन गोभी, बोक चॉय, ब्रोकली, स्टेविया, बीजरहित खीरा उगाने लगे। निशांत तिवारी ने बताया कि इन फसलों का उत्पादन वह वर्ष में तीन बार करते हैं।
इसमें एक वर्ष में लागत तकरीबन 3-4 लाख रुपये आती है और शुद्ध मुनाफा तकरीबन 9 से 10 लाख रुपये हो रहा है। आधुनिक खेती में अधिक मुनाफा मिलने के बाद उन्होंने पॉली हाउस के बाहर एक एकड़ जमीन पर फसल उगाना शुरू की। फसल की सिंचाई के लिए वह फिल्टर ड्रिप इरीगेशन से सिंचाई करते हैं। निशांत ने बताया कि वह अपनी उगाई गईं सब्जियों को समीपवर्ती मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और सागर में बेचते हैं।
इंडो-इस्राइल तकनीक से उगाया बिना बीज का खीरा
निशांत सबसे अधिक बिना बीज का खीरा उगा रहे हैं। इसके लिए इंडो-इस्राइल तकनीक अपनाई है। इसके अलावा लाल भिंडी, रंगीन गोभी, शिमला मिर्च के साथ विदेशी सब्जी स्वीट कॉर्न, बोक चॉय, स्टेविया, ब्रोकली उगा रहे हैं।
पारंपरिक खेती के मुकाबले ज्यादा मुनाफा
पॉली हाउस में फरवरी से सितंबर तक खीरा और अगस्त से जून के सीजन में शिमला मिर्च का उत्पादन करते हैं। वह सीजन में दो एकड़ जमीन से सोलह सौ क्विंटल खीरा और 2 एकड़ जमीन से 1000 क्विंटल शिमला मिर्च का उत्पादन करते हैं।