झांसी। आठ दिन के अंदर ऑक्सीजन की कमी से अपने पति और सांस दोनों को मरते देखा है। मुझे पता है ऑक्सीजन न मिल पाने का दर्द। मेरा परिवार पर दुखों का पहाड़ा टूट पड़ा। झांसी में ऑक्सीजन की कमी जान गंवा चुके कोरोना संक्रमितों के परिजनों के दास्तां केंद्र सरकार के ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत न जाने के दावे को झूठा साबित कर रही है।
देशभर में ऑक्सीजन की कमी को लेकर सियासी बवाल मचा है। इस बीच कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले लोगों को लेकर की गई अमर उजाला की पड़ताल में ऑक्सीजन को लेकर सरकारी दावे को झुठलाने हुए तथ्य सामने आए हैं। राजगढ़ निवासी महिला ने बताया कि उनके पति अवनेश जैन (40) 13 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव हो गए थे। 16 अप्रैल को हालत बिगड़ने पर लगी तो निजी अस्पताल लेकर गए। नर्सिंगहोमों ने ऑक्सीजन न होने का हवाला देते हुए भर्ती करने से इंकार कर दिया। इसके बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। मगर तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। उन्होंने बताया कि 23 अप्रैल को हसारी के श्रीनगर उनकी सांस सुधा जैन भी संक्रमित हो गईं। सांस लेने में परेशानी शुरू हुई तो उन्हें नर्सिंगहोम में भर्ती कराने के लिए गए। निजी अस्पतालों ने फिर ऑक्सीजन की कमी का हवाला देते हुए भर्ती करने से इंकार कर दिया। तब सांस ने कहा कि घर ले चलो। एक से दूसरे अस्पताल न भटको। 24 अप्रैल को घर पर तड़पते-तपड़ते उन्होंने भी दम तोड़ दिया। अवनेश की पत्नी का कहना है कि उन्होंने आठ दिन में पति और सांस दोनों को ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ते देखा है। वो जानती हैं, इसकी कमी का क्या दर्द है।
केस-2
छह दिन में उठ गया माता-पिता का साया
ऑक्सीजन की कमी आईटीआई में रहने वाले शिवलाल विश्वकर्मा और उनके परिवार पर भी काफी भारी पड़ी है। छह दिनों में ही बच्चों ने माता-पिता को खो दिया। बेटी प्रियंका ने बताया कि अप्रैल में कोरोना संक्रमित होने के बाद उसने पिता शिवलाल और मां प्रेमदेवी को निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। दो-तीन दिन बाद अचानक नर्सिंगहोम के स्टाफ ने कहा कि ऑक्सीजन की कमी हो गई है। कहीं और पिता को लेकर चले जाओ। इसके बाद कई नर्सिंगहोमों में गईं मगर कहीं पर बेड नहीं मिला। फिर एक दिन नर्सिंगहोम में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो गई। चार-पांच घंटे तक पिता बिना ऑक्सीजन के रहे। अगले दिन फिर से ऑक्सीजन खत्म हो गई। 20 अप्रैल को पिता ऑक्सीजन न मिल पाने की वजह से तड़पकर मर गए। इसके बाद मां को भी रोक-रोककर कम फ्लो करके ऑक्सीजन मिली तो उनकी भी 26 अप्रैल को मौत हो गई।
केस-3
चार नर्सिंगहोमों में भटके, सबने कहा-ऑक्सीजन नहीं है
रक्सा के डगरवाह निवासी मुकुंद सिंह यादव (85) की भी ऑक्सीजन न मिल पाने की वजह से जान चली गई। उनके पोते सोनपाल ने बताया कि दादा को तेज बुखार, खांसी और जुकाम हो गया था। सांस लेने में भी तकलीफ बढ़ते तो आसपास के डॉक्टरों को दिखाया। उन्होंने नर्सिंगहोम ले जाने के लिए कहा। 29 अप्रैल को एक से दूसरे, दूसरे से तीसरे और तीसरे से चौथे प्राइवेट हॉस्पिटल भागते रहे। हर जगह एक ही जवाब मिला कि हमारे पास ऑक्सीजन नहीं है। बाद में उन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे तो डॉक्टरों ने जांच कर कहा कि उनकी सांसें थम चुकी हैं।