झांसी। एक साथ दो लाश उठती देख गांव के लोगों की आंखें पथरा उठीं। सबकी जुबां पर एक बात तैर रही थी कि अगर लोगों को गांव में पानी मिलता तब शायद यह हादसा न होता। सैकड़ों लोग पानी के लिए रोजाना अपनी जान दांव पर लगाने को मजबूर हैं।
बिजौली इलाके में पानी की विकराल समस्या है। पिछले माह ही पानी भरने के विवाद में एक महिला की जान चली गई। रावतयाना गांव के लोगों का कहना है कि पानी ही सबसे बड़ी समस्या है। पानी न होने से ही लोग छोटे-छोटे बच्चों को भी इस खतरनाक जलाशय तक भेजने को मजबूर हैं। करीब आठ सौ आबादी वाले इस पूरे इलाके में महज दो हैंडपंप हैं। गर्मी में यह हैंडपंप भी बेदम हो जाते हैं। अपनी जरूरत का पानी लोगों को यहीं से लाना पड़ता है। पानी ढोने से बचने के लिए लोग कपड़े आदि यहीं ले जाकर साफ करते हैं। काफी गहरा एवं असुरक्षित होने के बावजूद गांव के लोग खतरा उठाकर यहीं नहाते हैं। यह काम गांव के लोगों की दिनचर्या में शुमार हो चुका और इसी दौरान आज यह दर्दनाक हादसा हो गया। गांव के रहने वाले अजीत, अरविंद, राकेश आदि का कहना है कि गांव में पानी के लिए कई बार गुहार लगाई गई। गर्मियों में जल संस्थान की ओर से सिर्फ दो टैंकर भेजे जाते हैं। इतनी बड़ी आबादी में इनका पता ही नहीं चलता। पानी में डूबी अंशिका के घर में दादी, दो बहनें, पिता समेत पांच सदस्य हैं। सभी लोग रोजाना वहीं पर नहाते और कपड़े धुलने जाते थे। अंशिका की बड़ी बहन वंदना कुछ देर पहले ही कपड़े धुलकर वहां से आई थी। इसी तरह अर्जुन का भी परिवार वहीं से अपनी पानी की जरुरत पूरी करता है। कुछ दिनों पहले ही घर में शादी होने की वजह से उसकी भांजी शिवानी यहां आई थी। इसी तरह गांव के दूसरे लोग भी अपनी जरूरत का पानी यहीं से पूरी करते हैं।
22 दिन पहले घर में थी धूम, आज पसर गया मातम
अुर्जन के बड़े भाई अरविंद की शादी 1 जुलाई को धूमधाम के साथ हुई। घर में खूब जश्न हुआ। परिवार के लोगों से पूरा घर भरा हुआ था। अब अर्जुन की शादी की तैयारी थी लेकिन, आज अचानक परिवार पर काल टूट पड़ा। जिस आंगन में खुशियों के गीत गाए जा रहे थे वहां आज अर्जुन के मां की चीत्कार गूंज रही थी। वह हर किसी से अपने लड़के को लौटा लाने की गुहार कर रही थी। पड़ोसियों की आंखें भी नम हो उठीं। वहीं, अंशिका के परिवार ने दस जून को अंशिका का जन्मदिन धूमधाम से मनाया था लेकिन, आज करीब सवा महीने बाद उसका शव आंगन में पड़ा था। उसकी बहन वंदना एवं सोनम उसकी याद में सुबुक रहीं थीं। पड़ोसियों के मुताबिक मां के न होने के बाद उसका लालन-पालन उसकी दादी ही कर रही थीं। अंशिका का शव देखते ही वह बेसुध होकर गिर पड़ीं।
पार्षद ने की नगर आयुक्त से शिकायत
बिजौली वार्ड से पार्षद गायत्री गुप्ता ने खदान के असुरक्षित तरीके से खुला होने पर रोष जताते हुए इसके आसपास फेसिंग कराए जाने की मांग नगर आयुक्त से की है। नगर आयुक्त को सौंपे एक ज्ञापन के जरिए उन्होंने कहा खदान काफी पहले बंद हो चुकी। काफी गहराई में होने की वजह से यह काफी खतरनाक हो चुकी है। ऐसे में जल्द ही इसकी फेसिंग कराए जाने की जरुरत है।