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कोरोना से बचाव की आड़ में लाखों का घपला

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झांसी। कोविड-19 जैसी आपदा में भी बिचौलियों ने कमाई का अवसर तलाश लिया। शासन ने सभी ग्राम पंचायतों को कोविड से बचाव के लिए चिकित्सीय उपकरण खरीदने के निर्देश दिए थे। इसका फायदा उठाते हुए सरकारी अफसरों की शह पर ग्राम पंचायतों से मनमाने रेट में खरीद कराई गई। 496 ग्राम पंचायतों में अधिकांश में खरीद कराई जा चुकी है जबकि कुछ ग्राम प्रधान राजी नहीं हुए। इस मामले में लाखों रुपये के गोलमाल की आशंका जताई जा रही है। केंद्र और प्रदेश सरकार दोनों चाइनीज ठेके निरस्त कर रही हैं, वहां बने उत्पादों का उपयोग न करने का निर्देश दे रही हैं, इसके बावजूद भारतीय ब्रांडेड स्वास्थ्य उपकरणों को दरकिनार कर अधिक कीमत पर चाइनीज उत्पाद खरीदे गए हैं।
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पूरे प्रदेश में कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए 23 जून को अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने शासनादेश के जरिए प्रत्येक ग्राम पंचायतों को इसकी रोकथाम के लिए चिकित्सीय उपकरणों की खरीद के निर्देश दिए। किट में एक पल्स ऑक्सीमीटर, एक इंफ्रारेड थर्मामीटर, 500 पीस थ्री लेयर मास्क, 100 सर्जिकल ग्लव्स, पंाच लीटर सैनिटाइजर समेत फेस शील्ड शामिल थी। पंचायती राज विभाग के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक शासनादेश जारी होते ही मजबूत पकड़ रखने वाली एजेंसी ने घुसपैठ शुरू कर दी। शासनादेश के उलट केंद्रीय खरीद की तैयारी शुरू हो गई लेकिन, मामले की भनक मंडल के एक आला अफसर को लग गई। इस वजह से रास्ता बदलकर आखिरकार इसकी खरीद ब्लॉक स्तर पर कराई गई। सूत्रों के मुताबिक 74 लाख के इन चिकित्सीय उपकरणों की खरीद के लिए कोई भी टेंडर नहीं कराया गया।
टेंडर न होने से मनमाने तरीके से उपकरणों के दाम तय किए गए। एक थर्मल स्कैनर 3500-5000 रुपये तक खरीदे गए जबकि ब्रांडेड थर्मल स्कैनर अधिकतम दो हजार रुपये में बाजार में मौजूद है। खास बात यह कि खरीदे गए थर्मल स्कैनर चाइनीज हैं। इसी तरह फिंगर ऑक्सीमीटर बाजार की कीमत से ढाई गुना अधिक में खरीदे गए। यह भी ब्रांडेड नहीं है। एक थ्री प्लाई मॉस्क करीब 720 रुपये में खरीदी गई। ग्लव्स एवं फेस शील्ड भी बाजार से ऊंचे दाम में खरीदे गए। इस तरह एक किट 15 हजार रुपये से अधिक कीमत में खरीदी गई जबकि इसकी अधिकतम कीमत सात हजार से अधिक नहीं बताई जा रही। खरीद के बाद बिल भी प्रधान एवं सचिवों के नाम से ही बनवाए गए हैं। तमाम प्रधान तो राजी हो गए लेकिन, कुछ ग्राम प्रधानों ने धांधली का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया। कई सचिव भी इस तरह की खरीदारी से संतुष्ट नहीं हैं लेकिन विभागीय अफसरों का नाम होने से उन्होंने चुप्पी साध रखी है।
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अभी यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसी कोई गड़बड़ी की गई है तब मामले की निश्चित तौर पर जांच कराई जाएगी। दोषी मिलने पर संबंधित से सरकारी पैसों की वसूली भी कराई जाएगी। शैलेष कुमार, सीडीओ
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