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क्यों रहे देशों के रिश्तों में खटास, अपनी हिंदी अमेरिका-रूस सब जगह घोल रही मिठास

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झांसी से मातृभाषा की मुहिम कई देशों में हिंदी क मिठास घोल रही है। - फोटो : ???? ????
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क्यों रहे देशों के रिश्तों में खटास, अपनी हिंदी अमेरिका-रूस सब जगह घोल रही मिठास
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झांसी। कोरोनाकाल में विश्व में अस्थिरता का माहौल है। उद्योग-व्यापार से लेकर कला-संस्कृति तक सब प्रभावित हैं। वैश्विक महामारी व तमाम अन्य कारणों से देशों के आपसी संबंधों तक में खटास आई है। इसके बावजूद झांसी से मातृभाष सेवा की मुहिम तमाम देशों में हिंदी की मिठास घोल रही है। झांसी की माटी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्था ‘हिंदी साहित्य भारती’ के गठन के बाद अब इसके विस्तार पर तेजी से काम चल रहा है। संस्था के केंद्रीय अध्यक्ष साहित्यकार और पूर्व मंत्री डॉ. रवींद्र शुक्ल ने संस्था का विश्वव्यापी विस्तार करते हुए अमेरिका, रूस, इंग्लैंड समेत विश्व के 17 देशों से जुड़े विभिन्न साहित्य मनीषी व साहित्यिक अभिरुचि के समाजसेवियों और उद्योगपतियों को हिंदी का झंडा बुलंद करने का आग्रहपूर्वक जिम्मा सौंपा है। जिसे इन लोगों ने सहर्ष स्वीकारा है।
हिंदी साहित्य भारती के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ रवींद्र शुक्ल और रक्षा एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय ने संस्था की अंतरराष्ट्रीय समिति के सभी देशों के संयोजकों को हार्दिक बधाई देते हुए अपेक्षा की है कि वे अपने-अपने देशों की कार्यकारिणी शीघ्र ही गठित करके हिंदी साहित्य तथा हिंदी भाषा के उन्नयन एवं हिंदी को विश्वभाषा के पद पर प्रतिष्ठित करने में अपना सक्रिय योगदान दें। अंतरराष्ट्रीय उप समिति सदस्य प्रो. विनोद कुमार मिश्रा महासचिव हिंदी सचिवालय, मारीशस और अजरबाईजान की साइदा मिर्जायेवा ने भी हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने में रुचि दिखाई है।
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इस मुहिम के लिए हिंदी साहित्य भारती के केंद्रीय महामंत्री डॉ. अनिल शर्मा, केंद्रीय मीडिया संयोजक डॉ. रमा सिंह, संयोजन समिति रामचरण रुचिर एवं समस्त केंद्रीय कार्यकारिणी एवं प्रादेशिक पदाधिकारीगण ने केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. रवींद्र शुक्ल को साधुवाद देते हुए उनके द्वारा किए गए हिंदी के व्यापक विस्तार एवं उन्नयन में महती भूमिका निभाने के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समिति के सदस्यों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। संकल्प लिया कि हिंदी के प्रचार-प्रसार और सम्मान के लिए लगातार प्रयत्नशील रहेंगे।
समिति का स्वरूप इस प्रकार गठित किया गया है.
अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष
डॉ. रवींद्र शुक्ल
अंतरराष्ट्रीय महासचिव
डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय
विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग
मुंबई विश्वविद्यालय मुंबई
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विविध देशों के संयोजकों की सूची
अमेरिका: डॉ.नीलू गुप्ता, कैलीफोर्निया वरिष्ठ कवियित्री, समाजसेवी उद्योगपति।
श्रीलंका: डॉ. उपुल रंजीथा अध्यक्ष हिंदी विभाग केलानिया विश्वविद्यालय, श्रीलंका।
जापान: डॉ. तोमोको किकुचि हिंदी और जापानी की प्रख्यात लेखिका फुकुशीमा, जापान।
इस्राइल: डॉ.गेनादी श्लोम्पर, प्रसिद्ध साहित्यकार और प्रोफेसर, इस्राइल।
कनाडा: डॉ. रत्नाकर नराले प्रख्यात चिंतक और पुस्तक भारती संस्थान के संस्थापक, टोरंटो, कनाडा।
पोलैंड: डॉ.सुधांशु शुक्ल, अध्यक्ष भारतीय सांस्कृतिक और संबंध परिषद पीठ, वारसा पोलैंड।
नेपाल: डॉ.श्वेता दीप्ति अध्यक्ष हिंदी विभाग, त्रिभुवन विश्वविद्यालय, काठमांडू, नेपाल।
मारीशस: डॉ.हेमराज सुंदर, सहयोगी प्राध्यापक महात्मा गांधी संस्थान, मोका, मारीशस।
रूस: डॉ.रामेश्वर सिंह, अध्यक्ष भारत-रूस मैत्री संघ, मास्को।
इंग्लैंड: तेजेंद्र शर्मा, प्रख्यात कहानीकार और संस्थापक ‘कथा’ यूके।
कंबोडिया: मनीष शर्मा मुख्य कार्यकारी अधिकारी, कंबोडियन क्रिकेट संघ, कंबोडिया।
संयुक्त अरब अमीरात: पंकज कुमार सिंह दुबई, संयुक्त अरब अमीरात।
यूक्रेन: राकेश शंकर भारती, साहित्यकार यूक्रेेन।
नार्वे: डॉ. सुरेशचंद्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ ओस्लो।
त्रिनिदाद एंड टुबेगो: कादंबरी आदेश।
आस्ट्रेलिया: डॉ.संजय अग्निहोत्री, वरिष्ठ साहित्यकार सिडनी।
अजरबाईजान: साइदा मिर्जायेवा
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