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विभागों ने नहीं किया काम, पैसों पर कुंडली मारे बैठे रहे

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झांसी। मनरेगा मजदूरों को ज्यादा से ज्यादा काम देने की मंशा पर जिम्मेदार अधिकारियों ने पलीता लगा दिया। हालातों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विभागों को चार करोड़ रुपये से अधिक के कार्य कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन उन्होंने धेला भर का काम नहीं कराया। जिलाधिकारी आंद्रा वामसी ने उनके इस कार्य प्रणाली पर नाराजगी व्यक्त की है।
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विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी ने मनरेगा के अंतर्गत कंवर्जेंस से जुड़े कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल मनरेगा में श्रमिकों को प्राथमिकता से काम उपलब्ध कराया जाना था। लेकिन, कुछ विभागों ने पैसा सरेंडर कर दिया और कोई काम नहीं किया। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की विभिन्न इकाइयों को 242.63 लाख रुपये के 320 कामों के माध्यम से बंधी डालने का काम करना था, लेकिन विभाग ने एक पैसे का काम नहीं किया।
इसी तरह लघु सिंचाई विभाग को 59.20 लाख रुपये से 16 कार्य करने थे। इसमें गूलों की खुदाई, नाला विकास और चेकडैम मरम्मत कार्य किए जाने थे। इसमें 124455 मानव दिवस सृजित किए जाने थे, लेकिन 3918 दिवस ही सृजित किए गए। भूमि संरक्षण अधिकारी राष्ट्रीय जलागम झांसी, राष्ट्रीय जलागम चिरगांव, राष्ट्रीय जलागम मऊरानीपुर, भूमि संरक्षण अधिकारी मैदानी योजना झांसी को 112 लाख रुपये के 96 कार्य खेतों में बंधी डालने के करने थे, लेकिन पैसा सरेंडर कर दिया। समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को फटकार लगाई और कहा कि अपनी कार्यप्रणाली में सुधर लाएं। अधिकारी व्यक्तिगत रुचि लेकर काम कराएं। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी शैलेष कुमार, उपायुक्त मनरेगा रामऔतार सिंह आदि मौजूद रहे।
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