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सवा दो सौ साल पुराने पारीछा डैम को नई सांस देगी केन-बेतवा परियोजना

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झांसी। केन-बेतवा लिंक परियोजना की मदद से झांसी के सबसे पुराने डैम पारीछा को नई सांस मिल सकेगी। पहले इस परियोजना में करीब सवा दो सौ साल पुराने इस डैम को डुबाकर इसकी जगह नया डैम बनाने की तैयारी थी लेकिन, कुछ दिनों पहले आई केंद्रीय टीम ने बांध की मजबूती को देखते हुए इसकी मरम्मत कराकर आगे करीब पचास साल तक काम करने के लिए उपयोगी पाया है। ऐसे में अब परियोजना के माध्यम से इसका पुनर्निर्माण कराने की योजना तैयार की जा रही है। इस काम में करीब सौ करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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सिंचाई विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक बेतवा नदी के बहाव का 1855 में पहली बार सर्वे हुआ था। इसके बाद वर्ष 1857 में गदर के चलते यह मामला ठंडे बस्ते में पहुंच गया। करीब 1875 में पारीछा गांव में सबसे पहले यह बांध बनकर तैयार हुआ हालांकि पानी की जरूरत पूरी न होने पर पारीछा से करीब 112 मील ऊपर वर्ष 1901 में सुकुवां-ढुकुवां डैम बनाया गया। यह दोनों ही डैम पत्थर, चूना एवं सुर्खी से बने हैं। तकनीकी लिहाज से यह दोनों बांध आज भी बेजोड़ हैं लेकिन, यह अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं।
इसको देखते हुए केन-बेतवा परियोजना में मौजूदा पारीछा बांध को डूबो कर उससे पांच सौ मीटर नीचे नई संरचना बनाने का प्रस्ताव था। पिछले सप्ताह केंद्रीय जल आयोग समेत अन्य विशेषज्ञों ने यहां पहुंचकर जांच पड़ताल की। उन्होंने इस बांध को अभी भी अगले पचास साल के लिए मजबूत पाया। सिंचाई अभियंताओं का कहना है सिल्टेड होने के बाद भी पानी स्टोर करने की क्षमता पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। अधीक्षण अभियंता संजीव झा का कहना है कि तकनीकी जानकारों ने परीक्षण के बाद इसके पुनर्निर्माण की आवश्यकता बताई है। इसका परीक्षण कराया जा रहा है। सब कुछ योजना मुताबिक रहा तब करीब सौ करोड़ की लागत से इसका पुनर्निर्माण कराया जाएगा।
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