झांसी। महानगर में चल रहे झांसी महोत्सव के मुक्ताकाशी मंच पर रविवार को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस मौके पर देश के प्रसिद्घ कवियों ने काव्य पाठ कर देश के जवानों को नमन किया। साथ ही व्यवस्था पर व्यंग्य किया।
सम्मेलन का शुभारंभ मंडलायुक्त सुभाष चंद्र शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि झांसी महोत्सव में विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए जनता का स्वस्थ मनोरंजन किया जा रहा है। कवि सम्मेलन में लखनऊ के प्रख्यात मिश्र ने पढ़ा कि मानवता का मूल्य रहे बस इतना मंत्र हमारा है, दुनिया मेें सबसे विराट पावन गणतंत्र हमारा है। मुजफ्फनगर की कवियत्री प्रीति बौछार ने पढ़ा कि राणा के वंशज सोए हैं, इन्हें जगाने निकली हूं। दहशतगर्दों के गड्ढों में आग लगाने निकली हूं। संकट के बादल छाए हैं, इन्हें छांटने की खातिर, चूड़ी वाले हाथों से तलवार चलाने निकली हूं।
डॉ. मानसी द्विवेदी ने कविता पढ़ी कि गिन के तारीख दिन उंगलियां थक गईं, तुम किसी दिन अचानक चले आओ न। लखनऊ के धीरज मिश्र ने पढ़ा कि सैकड़ों बरस गुजर गए, पीर तुम सुना नहीं सके, हे विराट वृक्ष दो क्षमा, हम तुम्हें बचा नहीं सके। फैजाबाद के कवि जुमना प्रसाद उपाध्याय ने पढ़ा कि नदी के घाट पर भी सियासी लोग बस जाएं, तो प्यासे होंठ भी एक-एक बूंद पानी को तरस जाएं। लखनऊ के सूर्य कुमार पांडेय ने कहा कि गधे को जेब्रा कहकर मैं उल्लू करूं सीधा, मैं मर सकता हूूं ऐसी चापलूसी नहीं कर सकता।
मुरैना के हास्य कवि तेज नारायण बेचैन ने कविता पढ़ी कि सूर्योदय लाने का वादा वे लोग कर रहे हैं, जिनके खुद के चुनाव चिह्न लालटेन हैं। बाराबंकी के कवि प्रियांशु गजेंद्र ने पढ़ा कि यूं ही उलझे रहे तुम जो परदेस में, देश अपना ही परदेस हो जाएगा। फरीदाबाद के दिनेश रघुवंशी ने कविता पढ़ी कि बड़े लोगों की औलादें तो कैंडल मार्च करती हैं, जो अपने प्राण देते हैं, वो बेटे हैं किसानों के। मालविका हरिओम ने पढ़ा कि न फैल पाए नफरतों की कोई बेल यहां, जमीं पे प्यार मुहब्बत का बसेरा है बहुत। इस मौके पर कवियत्री पद्मिनी और अंबेडकरनगर के अभय सिंह निर्भीक ने भी काव्य पाठ किया। कवि सम्मेलन का संचालन डॉ. सरिता शर्मा ने किया। इस मौके पर डीएम शिव सहाय अवस्थी, सीडीओ निखिल टीकाराम फुंडे, नगर मजिस्ट्रेट सलिल पटेल मौजूद रहे।