झांसी। कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता की अहम भूमिका है। संक्रमण के दौर में योगासन और प्राणायाम का महत्व और भी बढ़ गया है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कपाल भाति प्राणायाम की अहम भूमिका है। यह प्राणायाम तमाम तरह की बीमारियों से मुक्ति दिलाने में कारगर है। योगाचार्य श्याम बुधौलिया बताते हैं कि भागदौड़ भरे जीवन में तनाव और अवसाद और अनियमित खानपान से रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कपाल भाति प्राणायाम की अहम भूमिका है।
ऐसे करें कपाल भाति
कपाल भाति करते समय हम पेट को पीठ में मारते हैं और पेट में भरी हुई श्वास को नासिका द्बारा बाहर जाने देते हैं। इस क्रिया को निरंतर दोहराते हैं। इसे करने की तीव्र, मध्यम और धीमी तीन विधियां हैं। तीव्र गति में एक मिनट में 70 से 90, मध्यम गति में 60 और धीमी गति में 20-30 झटके मारकर श्वास को छोड़ना चाहिए। इस प्राणायाम को योग्य योग शिक्षक की सलाह से करना चाहिए।
इन रोगों से मिलती है मुक्ति
कपालभाति करते समय हमारे दो तंत्र पाचन एवं श्वसन सक्रियता से कार्य करने लगते हैं। इससे वात पित्त एवं कफ में संतुलन होता है। प्राणायाम से वात रोग जैसे एडी़, पिंडली, घुटने, कमर एवं कंधे जाम, पित्त रोग भूख न लगना, खाना हजम नहीं होना, शरीर कमजोर, हमेशा थकान बनी रहना, कफ रोग आंखों से पानी आना, कान में दिक्कत, बार-बार जुकाम होना, सांस फू लना, दमा एवं तपेदिक नहीं होते हैं। इसके अलावा यह प्राणायाम मोटापा, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और गांठ को ठीक करने में रामबाण है।