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कन्या पूजन की संकल्प राशि लगाई गई जरूरतमंद लोगों की सहायता में

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झांसी। नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना के साथ ही कन्याओं के पूजन का महत्व है। कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन है। घरोें में सामूहिक रूप से कन्याओं का पूजन नहीं हो सका है। ऐसे में शहर के कई श्रद्धालुओं ने संकल्प धनराशि जरूरतमंद परिवारों को भेजी है। इनमें से कई ने भोजन का वितरण कराया, तो कुछ ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री सहायता कोष में राशि को जमा कराया है। इन श्रद्धालुओं के अनुसार यह भी बहुत पुनीत कार्य है।
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धार्मिक मान्यता के अंतर्गत घरों में दो से लेकर 10 वर्ष तक की आयु की नौ कन्याओं को श्रद्धालु तिलक, चरण वंदना कर भोजन कराते हैं। उन्हें आकर्षक उपहार दक्षिणा में प्रदान करते हैं। मान्यता है कि यह कन्याएं मां दुर्गा के नौ स्वरूप होते हैं। इनके साथ ही लांगूरा (छोटा बालक) जो हनुमान जी व बटुक भैरव का स्वरूप माना जाता है, को भी इन कन्याओं के साथ पूजा जाता है।
लॉकडाउन के कारण कन्याओं का पूजन व उन्हें भोजन करा पाना संभव नहीं है। ऐसे में संकल्प धनराशि 1100 रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कर दी है ताकि वह देश के काम आ सके।
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संजय दुबे, अन्नपूर्णा कालोनी
कन्याओं को घर में पूजा के लिए आमंत्रण नहीं कर सका। ऐसे में उन्हें दी जाने वाली दक्षिणा व पूजा में लगने वाली धनराशि जरूरतमंद परिवारों को दिए जा रहे भोजन में खर्च कर दी है।
डा. अंजनी श्रीवास्तव, आदर्श नगर सीपरी
कोरोना वायरस जैसी महामारी जल्द से जल्द समाप्त हो, यह ईश्वर से प्रार्थना है। कन्या पूजा में उपयोग धन को जरूरतमंद लोगों में आवश्यक सामग्री देकर प्रदान की जाएगी।
अजय सिंह, दतिया गेट
कन्याओं के पूजन व दक्षिणा के लिए 2113 रुपये खर्च करने का संकल्प लिया था। यह धनराशि अब जरूरतमंदों पर खर्च की जाएगी। इससे भी आत्मिक खुशी मिलेगी। माता रानी की सच्ची भक्ति भी हो जाएगी।
चंद्र प्रकाश नैनवानी, कैलाश रेजीडेंसी
कन्या पूजन का महत्व है। लेकिन लॉकडाउन के कारण यह पूजा कार्य संभव नहीं है। वर्तमान स्थिति में जरूरतमंदों की सहायता ही मां अंबे की पूजा के समान है।
आलोक शांडिल्य, महेंद्र पुरी कालोनी
नवरात्र में जो धन हम लोग कन्याओं के भोजन व पूजा में खर्च करते हैं, इस बार उसे जरूरतमंद परिवारों पर खर्च किया जा रहा है। यह भी समाज और धर्म की सच्ची सेवा है।
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प्रशांत पांडेय, लहर गिर्द
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