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बुंदेलखंड के लिए काबुली चना की प्रजाति का विमोचन

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झांसी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक और रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. पंजाब सिंह ने यूनिवर्सिटी का दौरा किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के नवनिर्मित भवन और विकसित प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान विश्वविद्यालय द्वारा विकसित काबुली चना की प्रजाति आरएलबीजी के-1 का विमोचन किया। यह प्रजाति अक्तूबर में बोने के लिए उपयुक्त है। इसकी औसत पैदावार 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। पकने की अवधि 100 से 104 दिन है।
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कुलाधिपति ने प्रक्षेत्र पर लगे अनुसंधान प्रयोगों, प्रदर्शनों तथा वर्मी कंपोस्ट और समेकित खेती प्रणाली इकाई की जानकारी ली। विश्वविद्यालय द्वारा बुंदेलखंड के लिए संभावित अधिक उपजशील फलों जैसे अंजीर, बेल, बेर, अनार, अमरूद, स्ट्राबेरी और विदेशी सब्जियों के खेतों का निरीक्षण किया। चना, सरसों, अलसी और गेहूं पर लगे प्रयोगों को देखा। मल्टीटायर वानिकी प्रक्षेत्र का भी निरीक्षण किया। कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, प्राध्यापकों और छात्रों के साथ अलग-अलग समीक्षा बैठक की।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के दो संस्थानों ग्रासलैंड तथा काफरी के साथ विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों की समीक्षा बैठक भी हुई। उन्होंने उच्च स्तर की शिक्षा और शोध के साथ बुंदेलखंड के किसानों की आय बढ़ाकर जीवन स्तर सुधारने के लिए गुणवत्तापरक कृषि प्रसार पर जोर दिया और तीनों केंद्रीय संस्थानों को साथ मिलकर काम करने की अपील की। कुलपति डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. एसएस सिंह, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. एआर शर्मा, डॉ. एसके चतुर्वेदी, डॉ. एके पांडेय, डॉ. मुकेश श्रीवास्तव, डॉ. एसएस कुशवाहा, केंद्रीय संस्थानों के निदेशक डॉ. विजय यादव, डॉ. अरुणाचलम मौजूद थे।
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