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Health: समय पर जांच से बच सकती है जहर निगलने वाले की जान, झांसी मेडिकल कॉलेज में हुआ शोध

Thu, 26 Mar 2026 01:27 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क

सार

शोध में शामिल 97 मरीजों में से 11 ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों की जांच में पाया गया कि उनमें पीएच स्तर काफी कम था, पोटेशियम असंतुलित था, श्वेत रक्त कोशिकाएं बढ़ी हुई थीं और लिवर एंजाइम का स्तर अधिक था।
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मेडिकल कॉलेज, झांसी - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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कीटनाशक का जहर शरीर में कितना असर कर रहा है, इसकी समय पर जांच और सही इलाज से मरीज की जान बचाई जा सकती है। कीटनाशक तब घातक हो जाता है जब रक्त में पीएच स्तर कम हो जाता है और एसिड स्तर बढ़ जाता है। इससे सांस लेने में दिक्कत होती है। किडनी समेत कई अंगों के फेल होने से मरीज की मौत हो सकती है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में हुए एक साल के शोध में यह बात सामने आई है।
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मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जकी सिद्दीकी ने कीटनाशक निगलने के बाद बुंदेलखंड के विभिन्न हिस्सों से आए 97 गंभीर मरीजों पर अध्ययन किया, जिनकी औसत आयु 34 वर्ष थी। इनमें 60 प्रतिशत पुरुष और 40 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं। अधिकांश मामलों में जानबूझकर कीटनाशक लिया गया था।

अध्ययन के अनुसार, ऑर्गेनोफॉस्फोरस विषाक्तता में मृत्यु का मुख्य कारण मेटाबोलिक एसिडोसिस (रक्त का पीएच स्तर कम होना) और शरीर में एसिड बढ़ना है। इससे श्वसन तंत्र प्रभावित होता है और लिवर-किडनी की कार्यप्रणाली बिगड़ने लगती है। गंभीर स्थिति में मरीज कोमा में जा सकता है, जिससे मृत्यु हो सकती है।
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शोध में शामिल 97 मरीजों में से 11 ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों की जांच में पाया गया कि उनमें पीएच स्तर काफी कम था, पोटेशियम असंतुलित था, श्वेत रक्त कोशिकाएं बढ़ी हुई थीं और लिवर एंजाइम (एसजीओटी व एसजीपीटी) का स्तर अधिक था। इसके अलावा, ब्लड यूरिया स्तर 30.7 एमजी/डीएल से अधिक पाया गया, जो गंभीर स्थिति का महत्वपूर्ण संकेतक (प्रोग्नोस्टिक मार्कर) है। अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि इन क्लीनिकल और लैब पैरामीटर की समय पर पहचान कर इलाज शुरू किया जाए तो मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

शरीर को गीले कपड़े से साफ करने से कम हो सकता है जहर का असर
डॉ. सिद्दीकी के अनुसार, कीटनाशक के सेवन के बाद शरीर से पसीने के माध्यम से जहर बाहर निकलता है। ऐसे में शरीर को गीले कपड़े से साफ करते रहने से त्वचा पर मौजूद जहर का असर कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि नमक का घोल पिलाना या घरेलू उपाय करना खतरनाक हो सकता है। मरीज को तुरंत करवट (रिकवरी पोजीशन) में लिटाकर अस्पताल पहुंचाना चाहिए, ताकि श्वसन मार्ग सुरक्षित रहे और समय पर इलाज मिल सके।

विषाक्तता के प्रमुख लक्षण
ऑर्गेनोफॉस्फोरस यौगिक शरीर के एंजाइम सिस्टम को प्रभावित करते हैं। इसके लक्षणों में अत्यधिक पसीना आना, मुंह से लार बहना, सांस लेने में कठिनाई, पुतलियों का सिकुड़ना, उल्टी-दस्त और मांसपेशियों में कंपन शामिल हैं।
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