झांसी। झांसी जंक्शन पर यात्री सुविधा के लिए बड़े-बड़े काम हो रहे हैं, लेकिन यहां मुफ्त में पानी तक मयस्सर नहीं है। स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या दो और तीन पर यात्रियों के लिए पीने के पानी का इंतजाम नहीं है। जबकि यहां रोजाना 24 से अधिक ट्रेनों का ठहराव होता है। इनमें अधिकांश ट्रेनें लंबी दूरी से आने वाली होती हैं।
पीने का पानी न मिलने से हजारों यात्रियों को मजबूरन ऊंचे दाम में पानी खरीदने पर मजबूर होना पड़ता है। यहां 72वें नंबर खंभे से लेकर ड्राइवर लॉबी के बीच करीब पांच सौ मीटर की दूरी के बीच पानी का एक भी प्वाइंट नहीं है। शाम के समय दोनों प्लेटफार्म पर गाड़ियां खड़ी होते ही पानी के लिए यात्री इधर-उधर भागते है। गाड़ियों का ठहराव कम समय के लिए होता है। कम प्वाइंट होने से यहां भीड़ हो जाती है। ऐसे में कई यात्रियों को पानी नहीं मिल पाता।
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प्यास से तड़पते रह गए
मंगलवार दोपहर करीब 1.21 बजे समता एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर तीन पर पहुंचती है। स्लीपर कोच से कई यात्री पानी पीने के लिए उतरते हैं लेकिन पानी के प्वाइंट कहीं नजर नहीं आए। आसपास मौजूद कुलियों से पूछने पर कुली ने प्लेटफार्म के दूसरे छोर की ओर इशारा कर दिया। जो वहां से करीब पांच सौ मीटर दूर है। जबकि गाड़ी का ठहराव महज चार मिनट का है। मजबूरन यात्री सूखे गले के साथ ही कोच में लौट गए।
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अधिक दामों पर बेची जाती पानी की बोतलें
पानी का इंतजाम नहीं होने से प्लेटफार्म पर ही ऊंचे दाम में पानी की बोतलें भी बेची जा रही हैं। लेकिन रेल प्रशासन इस बात को लेकर बेखबर है। यहां 96वें नंबर खंभे पर एक प्वांइट था लेकिन पुल बनाए जाने की वजह से यह प्वाइंट भी खत्म कर दिया गया।
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अक्सर बंद रहते हैं एस्कलेटर और लिफ्ट
झांसी स्टेशन के आधुनिकीकरण के दौरान प्लेटफार्म संख्या एक, दो व तीन में एस्कलेटर समेत लिफ्ट लगाई गई है। लेकिन अक्सर यह दोनों ही सुविधाएं यात्रियों को नहीं मिल पातीं। यात्रियों का कहना है प्लेटफार्म में लगे एक्सकेलेटर कभी-कभी ही चलाए जाते हैं। अक्सर इसे बंद ही रखा जाता है। यही हाल दो लिफ्टों का है। इन्हें भी सिर्फ किसी विशेष समय पर ही चलाया जाता है।
- पानी काफी दूर से लेकर आना पड़ा। यहां पानी न होने की वजह से दूसरी जगहों पर काफी भीड़ थी। वसीम रजा
- प्लेटफार्म पर पीने का पानी नहीं मिलता। इस वजह से महिलाओं एवं बच्चों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। बृजेश राय
- प्लेटफार्म पर जो प्वांइट हैं वहां भीड़ रहती है। लंबी दूरी की गाड़ियों के प्लेटफार्म में अतिरिक्त व्यवस्थाएं की जानी चाहिए। मनोज
- अपनी मनमर्जी के मुताबिक ही एस्केलेटर चलाए जाते हैं। अक्सर यह बंद ही रहते हैं। यही हाल यहां लगी लिफ्ट का है। विनोद
- अक्सर लिफ्ट बंद रहती है। भारी समान लेकर सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। दोपहर में भी इसे बंद ही रखा जाता है। मोहम्मद इस्माइल
जनसंपर्क अधिकारी मनोज सिंह का कहना है कि आवश्यकता के मुताबिक प्लेटफार्म पर पानी का इंतजाम किया गया है। यात्रियों की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। अफसरों द्वारा निगरानी की जाती है। कोई समस्या होने पर फीडबैक लिया जाएगा।