नवीनीकरण शुल्क बढ़ाकर 2500 रुपये कर दिया है। इतना ही नहीं, अब स्टॉम्प शुल्क के रूप में डीबीएल का 500, रायफल क 750 एवं रिवाल्वर का एक हजार रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। समय पर नवीनीकरण न करा पाने पर 2000 रुपये जुमार्ने का भुगतान करना पड़ता है।
समाज में रुतबा और हनक दिखाने के लिए शस्त्र रखने का शौक था लेकिन नवीनीकरण शुल्क की वजह से यह अब महंगा साबित हो रहा है। यही कारण है कि उम्रदराज अवस्था में पहुंचने वाले लोग अब शस्त्र लाइसेंस का विरासतन स्थानांतरण न कर इसे निरस्त कराने के लिए आवेदन दे रहे हैं। शस्त्र अनुभाग के अनुसार, वर्तमान में 20931 शस्त्र लाइसेंस जारी कराए गए हैं। इनमें से 208 लोग आवेदन देकर लाइसेंस निरस्त करा चुके हैं। इसके अलावा, लाइसेंस निरस्त के लिए कई आवेदन लंबित पड़े हुए हैं। कई लोगों ने 25 साल की अवस्था में शस्त्र लाइसेंस जारी कराया और 65 की उम्र में वापसी के लिए आवेदन दिया है।
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जिले के शस्त्र अनुभाग में लाइसेंस निरस्त कराने के आवेदन दिनोंदिन पहुंच रहे हैं। कुछ लोग अपने शस्त्र सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन से अनुमति लेकर दुकानों में रखे हुए हैं। वे उसका किराया भी देते हैं। वहीं नवीनीकरण शुल्क बढ़ने और लेट होने पर भारी भरकम जुर्माने से लोगों का शस्त्र से मोहभंग हो चला है। सिटी मजिस्ट्रेट प्रमोद झा ने बताया कि वर्तमान में जिले में 208 लोगों ने स्वेच्छा से अपना लाइसेंस निरस्त करा लिया है।
नवीनीकरण शुल्क बढ़ा
हर पांच साल में शस्त्र नवीनीकरण का प्रावधान है। पहले जहां डीबीएल के 600, रायफल के 900 व रिवाल्वर के 1500 रुपये लिए जाते थे। शासन ने सभी में एकरूपता लाते हुए अब नवीनीकरण शुल्क बढ़ाकर 2500 रुपये कर दिया है। इतना ही नहीं, अब स्टॉम्प शुल्क के रूप में डीबीएल का 500, रायफल क 750 एवं रिवाल्वर का एक हजार रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। समय पर नवीनीकरण न करा पाने पर 2000 रुपये जुमार्ने का भुगतान करना पड़ता है।