इस दौरान न तो इमरजेंसी और न ही ओपीडी में कर्मचारियों ने काम किया। पर्चे बनाने भी बंद कर दिए। इस वजह से मरीज बिना इलाज कराए ही लौटने लगे। कॉलेज प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें समझाकर मामला शांत कराने का प्रयास किया। मगर आक्रोशित कर्मचारी जूनियर रेजिडेंट के तीन महीने के निलंबन की मांग पर अड़े रहे। आनन-फानन में सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यप्रकाश ने जांच कमेटी का गठन किया। साथ ही समिति की रिपोर्ट आने तक विभागीय कक्षाओं और क्लीनिक कार्यों से निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई के बाद में कर्मचारी शाम को करीब चार बजे इमरजेंसी में काम पर लौटे और बिलिंग का काम भी शुरू हुआ।
सिर्फ 235 पर्चे ही बन पाए
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना एक हजार से अधिक मरीज विभिन्न विभागों में दिखाने के लिए आते हैं। विवाद से पहले तक गुरुवार की सुबह कॉलेज में 235 ओपीडी पर्चे बन गए थे। विवाद होने के बाद काम ठप हो गया। संभावना है कि लगभग एक हजार से ज्यादा मरीजों के बिना इलाज लौट गए।
मामले की जांच के लिए सर्जरी विभागाध्यक्ष ने कमेटी का गठन कर दिया है। साथ ही आरोपी जेआर को विभागीय कक्षाओं और क्लीनिक कार्यों से निलंबित कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज