झांसी। झांसी में स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर पहुंच गई हैं। हाल ये है कि जिले के एकमात्र एल-1 लेवल के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में बेड भरे चल रहे हैं। जिले भर में ऑक्सीजन का अकाल है। रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए परिजन कोरोना पॉजिटिव मरीज की जान की दुहाई देकर भीख मांगने को मजबूर हैं। मरीजों की कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है।
कोरोना की दूसरी लहर ने तमाम दावे-वादों और तैयारियों की हवा निकालकर रख दी है। ऑक्सीजन का जबरदस्त टोटा चल रहा है। बृहस्पतिवार को 28 मीट्रिक टन ऑक्सीजन तो जरूर आई मगर समझ नहीं आता कि सप्लाई किस प्रकार हुई। औषधि प्रशासन विभाग दावा करता रहा कि सभी नर्सिंगहोमों को सुबह से ही ऑक्सीजन की उपलब्धता करा दी गई मगर निजी अस्पताल मरीजों के परिजनों से ऑक्सीजन मंगवाते रहे। यही हाल शुक्रवार को भी रहा। परिजन दर-दर भटकते रहे। न उन्हें भूख की याद रही और न प्यास की। वह तो बस ऑटो में सिलिंडर लेकर ऑक्सीजन की गुहार लगाते रहे। यही हाल रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर भी है।
झांसी मेडिकल कॉलेज को मिलने वाले इंजेक्शन यहीं के मरीजों के लिए कम पड़ जाता है और मेडिकल स्टोरों पर तो पता ही नहीं चलता कब इंजेक्शन आया और कब बिक गया। नर्सिंगहोमों के साथ मेडिकल स्टोरों का गठजोड़ होने के चलते इंजेक्शन की जबरदस्त ब्लैक मार्केटिंग चल रही है। अपने मरीज की जान बचाने के लिए चाहें परिजनों को उधार ही क्यों न लेना पड़े मगर वो मुंह मांगी कीमत पर इंजेक्शन खरीदते हैं। एक बड़ी समस्या एल-3 अस्पताल मेडिकल कॉलेज की है। तमाम परेशानियों, असुविधाओं के बावजूद झांसी समेत बुंदेलखंड का एक बड़ा वर्ग यहां पर नि:शुल्क अथवा रियायती दरों पर इलाज कराने के लिए आता है। मगर अस्पताल कोरोना मरीजों से ठसाठस भरा हुआ है। इसलिए मरीजों को कोविड अस्पताल के भूतल पर जमीन पर लेटकर इलाज करना पड़ रहा है। कई बार तो एंबुलेंस में ही मरीज घंटों पड़े रहते हैं। बाद में कोई बेड या जगह खाली होने पर उन्हें अस्पताल में लाया जाता है।
ये हैं हालात
- मेडिकल कॉलेज कोविड हॉस्पिटल में सभी 230 बेड भरे।
- जिले में महज 180 वेंटिलेटर हैं। लगभग सभी भरे हुए हैं।
- मेडिकल में एक भी रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं, 100 गंभीर।
- कोविड अस्पताल में बेड फुल तो गैलरी में 20 मरीज ऑक्सीजन पर।
- सौ से ज्यादा नर्सिंगहोम पंजीकृत, 20-25 ही बने कोविड अस्पताल।
- झांसी में रेमडेसिविर की रोज 750 वॉयल की जरूरत है। 20-30 मिल रही।
केस-1
पांच घंटे नहीं रही ऑक्सीजन, भगवान भरोसे छोड़ दिया
आईटीआई निवासी एक व्यक्ति की पत्नी की कोरोना से तीन दिन पहले ही मौत हो चुकी है। अब उनकी हालत भी गंभीर है और निजी अस्पताल में आईसीयू में एडमिट हैं। उनकी बेटी ने बताया कि मां को तो खो चुकी हूं मगर पिता को बचाना चाहती हूं। बृहस्पतिवार की रात 12 बजे से शुक्रवार सुबह पांच बजे तक पिता बिना ऑक्सीजन के रहे। अब फिर ऑक्सीजन लाने के लिए कहा जा रहा है। सबकुछ भगवान के भरोसे छोड़ दिया है।
केस-2
हाथ-पांव जोड़े, फिर मिल गया सिलिंडर
पंचकुइयां निवासी शिक्षक की मां शिवाजी नगर स्थित कोविड नर्सिंगहोम में भर्ती हैं। नर्सिंगहोम में ऑक्सीजन खत्म होने लगी तो उन्होंने शिक्षक से गैस की व्यवस्था करने को कहा। शिक्षक इधर-उधर भटकते रहे। फिर वेल्डिंग वाले के पास जाकर हाथ-पांव जोड़े। मां की जिंदगी की दुहाई दी तब जाकर उन्हें एक सिलिंडर मिला। इसके बाद भी उन्होंने कई जगहों पर जाकर तीन-चार सिलिंडर की और व्यवस्था की।
बृहस्पतिवार को 28 मीट्रिक टन ऑक्सीजन आ गई है। नर्सिंगहोमों को मांग के अनुसार ऑक्सीजन की सप्लाई की गई है। इसके लिए चार सेंटर को अलग-अलग नर्सिंगहोमों का जिम्मा दे दिया गया है, ताकि कोई परेशानी न हो। अभी जिले में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन है। रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए कंपनियों से बात की जा रही है। - उमेश भारती, औषधि निरीक्षक।