झांसी। संदिग्धावस्था में होने वाली मौत की अब असल वजह झांसी में ही पता चल जाएगी। विसरा को जांच के लिए आगरा नहीं भेजा जाएगा। जी हां, राजगढ़ स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला में केवल झांसी ही नहीं, बल्कि कानपुर जोन के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों के विसरा का परीक्षण किया जाएगा। ये नई व्यवस्था लागू कर दी गई है।
पोस्टमार्टम के जरिये सभी शवों की मौत की असल वजह सामने नहीं आ पाती है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के परिसर में स्थित पोस्टमार्टम हाउस में अप्रैल और मई माह में दो सौ लाशों का पोस्टमार्टम किया गया, लेकिन इनमें से 80 की मौत की सही वजह पता नहीं चल पाई। ऐसे में इनके विसरा सुरक्षित कर लिए गए, जिन्हें जांच के लिए आगरा की प्रयोगशाला में भेजा जाना है। खासतौर पर जहर या विषाक्त पदार्थ के सेवन से होने वाली मौत का स्पष्ट कारण पोस्टमार्टम में सामने नहीं आता है। इसकी जानकारी विसरा परीक्षण के जरिये ही होती है। विसरा जांच के लिए आगरा भेजे जाने की वजह से रिपोर्ट आने में लंबा समय लग जाता था, लेकिन अब ये काम राजगढ़ पीएसी के पीछे स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फोरेंसिक साइंस लैब) में होगा। इसे लेकर विभागीय स्तर पर निर्देश निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
बंदूक और कारतूस की भी होगी जांच
झांसी। राजगढ़ स्थित फोरेंसिक साइंस लैब को एक और जिम्मेदारी मिली है। यहां आपराधिक घटनाओं में प्रयुक्त होने वाली बंदूक व कारतूस की भी जांच होगी। जांच में ये देखा जाएगा कि गोली बरामद हुए असलहा से चली है या नहीं। लैब की रिपोर्ट के आधार पर ही संबंधित केस की आगे की कार्यवाही तय होगी। विगत 25 मई से ये नहीं जिम्मेदारी दी गई है। यहां झांसी के अलावा प्रयागराज और कानपुर जोन के अंतर्गत आने वाले सभी जनपदों के असलहा व कारतूसों की जांच होगी। अब तक एक दर्जन मामले जांच के लिए यहां आ चुके हैं।
पकड़े नकली स्टांप और टिकट
झांसी। विधि विज्ञान प्रयोगशाला के शुरू होने के बाद से अब यहां दस्तावेजों की जांच होती आ रही थी। अब तक की जांच में प्रयोगशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए नकली स्टांप, टिकट पकड़े जा चुके हैं। एक स्टांप तो ऐसा पकड़ा गया, जिसका दुबारा से प्रयोग किया गया था। स्टांप पर पहले अंकित शब्दों को मिटाकर दूसरे लिखे गए गए थे। लेकिन, जांच में फर्जीबाड़ा खुल गया। स्टांप पर पहले लिखी गईं बातें भी सामने आ गईं।
विष से संबंधित विसरा का परीक्षण अब झांसी प्रयोगशाला में होगा। इसके अलावा आपराधिक घटनाओं में प्रयुक्त होने वाली बंदूक व कारतूसों की जांच भी यहां शुरू हो गई है। झांसी की विधि विज्ञान प्रयोगशाला का प्रदेश में दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। कानपुर जोन के साथ-साथ प्रयागराज जोन के नमूने भी यहां जांच के लिए आ रहे हैं।
- भूरी सिंह, उप निदेशक - विधि विज्ञान प्रयोगशाला