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झांसी कानपुर डबल ट्रैक का 2022 में पूरा होगा काम

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jhansi kanpur track doubling in 2022
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झांसी कानपुर के बीच सफर करने वाले मुसाफिरों को डबल ट्रैक से मिलने वाली राहत के लिए तीन साल और इंतजार करना होगा। दरअसल, पटरियां बिछाने के चल रहे धीमी गति के कारण काम की अवधि लगातार बढ़ती जा रही है। रेल विकास निगम लिमिटेड ने अब इस काम को पूरा करने का लक्ष्य 2022 तक कर दिया है।
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झांसी-कानपुर डबल ट्रैक में 206 किलोमीटर तक काम होना है। इसकी जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को सौंपी गई है। डबल ट्रैक को पूरा करने का लक्ष्य जून -2018 तय किया गया था। मगर, अभी तक 51 किलोमीटर ट्रैक का काम ही पूरा हो सका है। इसमें झांसी- पारीछा के बीच 24 किलोमीटर और पिरौना- एट व भुआ स्टेशन के बीच 27 किलोमीटर रेल लाइन बनकर तैयार हो चुकी है। इस पर ट्रेनें दौड़ने लगी हैं। अगले चरण में पारीछा से नंदखास और उरई के नजदीक स्थित सरकोजी से ऊसरगांव स्टेशन के बीच लाइन चालू की जानी है। इन स्टेशनों के बीच की दूरी 34 किलोमीटर है और इस काम को मार्च 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है।
साथ ही, ऊसरगांव से भीमसेन (69 किलोमीटर) तक का 264 करोड़ रुपये का काम हैदराबाद की कंपनी एसईडब्लू को सौंपा गया था, लेकिन यह कंपनी बीच में ही काम छोड़कर चली गईं। छूटे काम को चीन की चाइना रेल कंपनी डी 21 और हैदराबाद की श्री श्रीनिवासन कंस्ट्रक्शन कंपनी पूरा कर रही है। मगर, यह कंपनी भी अपना काम धीमी गति से कर रही है। इस कारण आरवीएनएल ने अब काम पूरा करने का लक्ष्य 2022 कर दिया है।
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झांसी कानपुर डबल ट्रैक का काम 2022 तक पूरा हो सकेगा। पारीछा से नंदखास और उरई के नजदीक स्थित सरकोजी से ऊसरगांव स्टेशन के बीच पटरियां बिछाने का काम पूरा हो गया है। नए साल में इन दोनों सेक्शन पर भी ट्रेनों को दौड़ाने का काम शुरू हो जाएगा।
संदीप माथुर, मंडल रेल प्रबंधक
यह होती है परेशानी
अभी झांसी-कानपुर सिंगल रेलवे ट्रैक पर प्रतिदिन 40 से अधिक अप और डाउन की सवारी ट्रेनों का संचालन होता है। इतनी ही संख्या में मालगाड़ियां भी दौड़ती हैं। एक ट्रेन को निकालने में सामने आ रही दूसरी ट्रेन को नजदीक के रेलवे स्टेशन पर रोकना पड़ता है। इसका सीधा असर ट्रेनों के समय पालन पर पड़ता है। सबसे ज्यादा ट्रेनों को झांसी आने के पहले मुस्तरा स्टेशन पर रोका जाता है। यही कारण है कि कानपुर से आने वाली अधिकांश ट्रेनें समय पर झांसी नहीं आ पाती हैं। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है। दूसरा ट्रैक बनने पर संबंधित सेक्शन में तेजी से ट्रेनें दौड़ने लगेंगी।
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