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झांसी: मीना हत्याकांड में बड़ा खुलासा, आरोपियों ने कबूल किया गुनाह, दवा में मिलाया था जहर 

Sat, 28 Sep 2019 09:49 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
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मीना (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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झांसी। थाना नवाबाद क्षेत्र से अपहृत मीना सोनी की दवा के धोखे में जहर देकर संजय वर्मा ने हत्या की थी। शव ठिकानेे लगाने के लिए झांसी से चार लोगाें को बुलाया था। चारों ने यमुना एक्सप्रेसवे से आगरा व औरैया होते हुए कालपी पहुंचकर पुल से यमुना नदी में लाश फेंक दी थी। पुलिस ने चारों आरोेपियों को गिरफ्तार कर लिया है। लाश ठिकाने लगाने के लिए एक लाख पांच हजार रुपये मेें सौदा हुआ था।
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एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि तालबेहट निवासी श्यामलता सोनी ने कोतवाली के वासुदेव मोहल्ला निवासी संजय वर्मा पर पुत्री का अपहरण कर दुबई ले जाने की रिपोर्ट दर्र्ज कराई थी। पिछले सप्ताह पुलिस ने कारोबारी संजय वर्मा के चालक योगेश कुमार को पकड़ा था। उससे की गई पूछताछ में पता चला था कि संजय वर्मा ने उसे बताया था कि मीना को मारकर यमुना नदी में बहा दिया है। चालक को रिमांड पर लेने के बाद पुलिस टीम दिल्ली गई थी, जहां की गई पड़ताल के दौैरान पता चला था कि मीना सोनी की हत्या मेें संजय वर्मा के साथ और लोग भी शामिल थे। कॉल रिकॉॅर्ड व अन्य सूत्रों की मदद से शनिवार को नवाबाद प्रभारी संजय सिंह, रक्सा थानाध्यक्ष व सर्विलॉस प्रभारी विजय कुमार पांडेय और स्वॉट टीम प्रभारी जितेंद्र सिंह तक्खर ने घटना में शामिल कोतवाली के डड़ियापुरा स्थित शिव परिवार कॉलोनी निवासी जितेंद्र राय, जालौन के राजेंद्र नगर निवासी नरेंद्र, बैंकर्स कॉलोनी निवासी सर्वेश कुमार और थाना सीपरी बाजार स्थित काशीराम कॉलोनी निवासी जयनारायण लिटौरिया को पकड़ा।

पकड़े गए मुख्य आरोपी सर्वेश ने पूछताछ में बताया कि संजय वर्मा ने मीना सोनी को मारकर लाश ठिकाने लगाने के लिए दिल्ली बुलाया था। उसने यह भी कहा कि दो तीन साथी भी मदद के लिए साथ ले आना, ताकि परेशानी न हो। उसने पहले जितेंद्र राय को बुलाया, उसके पास इनोवा गाड़ी थी। उसकी गाड़ी से ही दिल्ली जाने की योजना बनी। इसके लिए नरेंद्र व जयनारायण को भी साथ लेकर सभी 25 मार्च को दिल्ली पहुंचे। सभी लोग दिल्ली के पहाड़गंज स्थित एक हॉस्पिटल में रुके थे। अगले दिन 26 मार्च की रात करीब नौ बजे संजय वर्मा, मीना सोनी को लेकर अपोलो हॉस्पिटल के पीछे वाइन शॉॅप के पास आए, जहां मीना उनके साथ नशे की हालत में थी। इसके बाद संजय वर्मा ने उसे ठिकाने लगाने के लिए कहा। सभी लोग झांसी आने के लिए निकले, इसी दौरान मीना सोनी की तबीयत खराब होने लगी। जिस पर सभी ने पहले ही जहर खिलाने की तैयारी कर रखी थी। जिसके चलते मीना को दवा के धोखे में जहर खिला दिया औैर कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। उसकी लाश को ठिकाने लगाने के लिए झांसी न आकर यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ चल दिए। यहां से आगरा व औरैया होते हुए कालपी में यमुना नदी के पुल पर पहुंचे। सुबह करीब 3.30 बजे लाश को यमुना नदी में फेंक दिया। कुछ देर में लाश पानी से दूर जाने के बाद सभी कार में सवार होकर झांसी आ गए। पूछताछ में आरोपी सर्वेश ने बताया कि लाश ठिकाने लगाने के लिए एक लाख पांच हजार रुपये में सौदा हुआ था। एडवांस में संजय ने पंद्रह हजार रुपये दिए थे, बाकी के 90 हजार झांसी आने के बाद मिले थे। सभी के हिस्से में बीस - बीस हजार के करीब रकम आई थी। खुलासे में एसपी सिटी श्रीप्रकाश द्विवेदी, सीओ सिटी अभिषेक कुमार राहुल भी मौजूद रहे।
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पार्सल लाने की कहकर ले गया था साथियों को
हत्या की साजिश संजय वर्मा व मुख्य आरोपी सर्वेश ने रची थी। जितेंद्र व जयनारायण को यह कहकर सर्वेश दिल्ली ले गया था कि एक पार्सल दिल्ली से झांसी लाना है, जिसके एवज में कुछ रुपये भी मिलेंगे। इसकी लालच मेें आकर दोनों सर्वेश के साथ दिल्ली रवाना हो गए थे। यहां गाड़ी में उसकी हत्या देखकर दोनों घबरा गए थे, लेकिन ऐसे में उनके सामने कोई रास्ता भी नहीं बचा था।

मोबाइल पर जिंदा थी मीना
मीना को नदी में फेंकने से पहले उसका मोबाइल अपने पास रख लिया था। परिजन लगातार मोबाइल पर संपर्क कर रहे थे, लेकिन वह मात्र व्हाट्सएप पर ही सभी से संपर्क कर रहा था। परिजन मीना को जिंदा समझकर चेन की सांस ले रहे थे। चालक की गिरफ्तारी होने के बाद मौत की खबर मिलते ही परिजनों की नींद उड़ गई थी। उस दिन से संजय वर्मा ने मोबाइल चलाना बंद कर दिया था। इसके बाद उक्त मोबाइल को नोटघाट पुल से नदी में फेंककर वह वापस आ गया था। यह बात भी पकड़े गए आरोपियों से सामने आई है।

एडीजी व डीआईजी करेंगे सम्मानित
खुलासा करने वाली टीम में शामिल नवाबाद प्रभारी निरीक्षक संजय सिंह, रक्सा थानाध्यक्ष व सर्विलॉस टीम प्रभारी विजय कुमार पांडेय, स्वॉट टीम प्रभारी जितेंद्र सिंह तक्खर, मंडी चौकी प्रभारी सुरेंद्र प्रताप सिंह, राजीव सिंह, सोमेश सिंह, प्रदीप सेंगर, योगेंद्र चौहान, विमलेंदर, पदम गोस्वामी, दुर्गेश चौहान, मनोज कुमार व रमेश त्रिवेदी को एडीजी व डीआईजी सम्मानित करेंगे।

पुलिस ने शुरू किए गिरफ्तारी के प्रयास
पुलिस ने संजय वर्मा की गिरफ्तारी के साथ उस पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर ली है। हालांकि, वर्तमान में आरोपी संजय वर्मा हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे लिए हुए है, लेकिन पुलिस उस स्टे को खारिज करानेे की तैयारी में जुट गई है। एसएसपी ने बताया कि स्टे खारिज होते ही पुलिस गिरफ्तारी कर आगे की कार्र्रवाई करेगी।

खाताधारक की लोकेशन मिली भोपाल
मीना के खाते से भी लेनदेन भी हुआ था। जांच करने पर पता चला था कि कोतवाली निवासी एक व्यक्ति के खाते से भी संजय वर्मा लेनदेन कर रहा था। जांच के दौरान उक्त खाते में मोबाइल नंबर संजय वर्मा का रजिस्टर्ड निकला। पुलिस जब खाताधारक के घर पहुंची थी तो वह गायब मिला था। परिजनों ने बताया था कि वह लंबे समय से गायब है। शक होने पर पुलिस ने उसकी भी तलाश शुरू कर दी थी। पुलिस को उसकी लोकेशन भोपाल मिली है। जल्द ही पुलिस भोपाल पहुंचकर उससे भी पूरे मामले की जानकारी हासिल करेगी।

अदालत से तीन दिन का मिला रिमांड
 पुलिस के हत्थे चढ़े मीना के हत्यारों को पुलिस ने अदालत में पेश किया, जहां से पड़ताल के लिए अदालत से तीनों का रिमांड मिला है। जल्द ही पुलिस टीम पड़ताल करने के लिए सभी को घटनास्थल लेकर जाएगी। साथ ही पुलिस टीमें पुन: पूछताछ भी करेंगी।
पकडे़ गए आरोपियों से की गई पूछताछ में पुलिस को कई जानकारियां मिली हैं। आरोपियों ने बताया कि जिस समय मीना को कालपी स्थित यमुना नदी में फेंका, उस समय पानी अधिक था। पुलिस का अनुमान है कि अब लाश मिलना नामुमकिन है। पुलिस का यह भी मानना है कि आसपास के किसी न किसी थाना क्षेत्र मेें यदि शव मिला होगा तो उसका अंतिम संस्कार अज्ञात में किया गया होगा, ऐसे में पुलिस के पास फोटो या फिर अन्य सामान जरूर होगा। ऐसे में पुलिस ने चारों को अदालत में पेश कर रिमांड मांगा, जिस पर तीन दिन का रिमांड अदालत ने मंजूर किया है। रविवार तड़के पुलिस टीमें तीनों को घटनास्थल पर लेकर पहुंचेगी। यहां से सारी जानकारी कर शव खोजने के प्रयास होंगे। वर्तमान में भारी बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं। ऐसे में यमुना नदी का जलस्तर भी अधिक है। ऐसे में पुलिस टीम को मौके पर पहुंचकर खोजबीन करना आसान नहीं होगा।
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