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झांसी-ग्वालियर फ्लाईओवर : ऊपर चमाचम...नीचे ऊबड़खाबड़

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संवाद न्यूज एजेंसी

झांसी। ऊपर से चकाचक, नीचे नीचे ऊबड़खाबड...। झांसी-ग्वालियर ओवरब्रिज का कुछ ऐसा ही हाल है। सेतु निगम ने ब्रिज का निर्माण कर बेहतर आवागमन की सुविधा तो उपलब्ध करा दी, लेकिन नीचे न तो सर्विस रोड पूरा किया न ही मलबा, कबाड़ और निर्माण सामग्री हटाई। लोग गंदगी व उबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।



झांसी-ग्वालियर रेलवे क्रॉसिंग बंद होने से यहां काफी देर तक जाम लगता था। ऐसे में फ्लाईओवर बनाने का फैसला हुआ। कार्य की जिम्मेदारी सेतु निगम को दी गई। मार्च 2022 को कार्य प्रारंभ हुआ। अक्टूबर-2023 में एक तरफ का ढांचा और इसके बाद एक जनवरी 2025 को ओवरब्रिज का निर्माण पूरा कर आमजन के लिए सुपुर्द कर दिया गया। लेकिन, ब्रिज के नीचे जो सर्विस रोड बनाई गई, वह काफी संकरी और घटिया गुणवत्ता की है। सर्विस रोड भी आधा-अधूरा बनाकर छोड़ दिया गया। निर्माण सामग्री, कबाड़ और ब्रिज निर्माण में निकला मलबा भी यहां से नहीं हटाया गया। एक दर्जन से अधिक मोहल्लों और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े हजारों वाहनों का यहां से आना-जाना होता है।
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अंधा मोड़ होने के चलते हादसे की आशंका

- झांसी-ग्वालियर ओवरब्रिज से नीचे और नीचे से ब्रिज पर चढ़ने के लिए अंधा मोड़ है। दोनों ओर से आने-जाने वालों के समक्ष हादसे की आशंका बनी रहती है। इसके निदान के लिए यहां किसी तरह के इंतजाम नहीं किए गए हैं।



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बॉक्स में -



इन मोहल्ले के लोगों को हो रही परेशानी

- आईटीआई क्षेत्र



- पॉलिटेक्निक कॉलेज क्षेत्र

- सिद्धेश्वर नगर



- लहरगिर्द

- इन्द्रानगर



- सीपरी बाजार

- गणेश चौराहा



- अयोध्यापुरी

- दतियागेट



- उनाव गेट

- पीताम्बरा कॉलोनी



- थापक बाग

- उनाव बालाजी रोड





बॉक्स में -



1012.73 करोड़ की लागत से बना है 991.91 मीटर लंबा ओवरब्रिज

- 102.73 करोड़ रुपये की लागत से 991.91 मीटर लंबे ओवरब्रिज का निर्माण मार्च 2022 में हुआ था। पहले एक तरफ की लाइन और फिर दूसरी लाइन का निर्माण कराया गया। पहली लाइन जहां अक्टूबर-2023 से चालू की गई, वहीं दूसरी लाइन एक जनवरी 2025 को पूर्ण कर पब्लिक के लिए खोल दी गई।
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वर्जन -



- झांसी-ग्वालियर ओवरब्रिज एस्टीमेट में जो है, वह कार्य पूरा कर दिया गया है। नीचे केवल मलबा और मैटेरियल हटाया जाना है। उसको शीघ्र हटाकर सफाई की जाएगी। आने-जाने वालों की जो समस्या है, उसकाे भी दूर किया जाएगा।

- एमएस चौहान, प्रोजेक्ट मैनेजर, सेतु निगम।
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