मऊरानीपुर थाना क्षेत्र में दो वर्ष पहले सात वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) मोहम्मद नेयाज अहमद अंसारी की अदालत ने 62 वर्षीय दोषी गोविंद दास उर्फ बल्लू कुशवाहा को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। अदालत ने जुर्माने की राशि पीड़िता के पुनर्वास पर खर्च करने का आदेश दिया।
अभियोजन के अनुसार, 18 मई 2024 को बालिका घर के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। वह कक्षा दो की छात्रा थी। इसी दौरान आरोपी गोविंद दास उसे टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। करीब डेढ़ घंटे तक बच्ची घर नहीं लौटी तो परिजन उसकी तलाश में निकल पड़े। कुछ देर बाद बच्ची रोते हुए घर पहुंची और उसने परिजनों को पूरी घटना बताई। पिता की तहरीर पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की। विवेचना के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने साक्ष्य जुटाने के बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक ने अभियोजन पक्ष की ओर से पुख्ता साक्ष्य और गवाह पेश किए। साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने गोविंद दास उर्फ बल्लू कुशवाहा को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया और उसकी राशि पीड़िता के पुनर्वास पर खर्च करने का आदेश दिया।
छोटी बहन की गवाही बनी अहम
विशेष लोक अभियोजक के अनुसार, मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता की छह वर्षीय छोटी बहन ने भी न्यायालय में गवाही दी। उसने बताया कि गोविंद दास दोनों बहनों को टॉफी दिलाने के लिए अपने साथ ले गया था। वहां आरोपी ने उसकी बहन के साथ गलत काम किया और उसे वहां से भगा दिया। विशेष लोक अभियोजक ने आरोपी को उम्रकैद की सजा दिए जाने की दलील दी थी। हालांकि, आरोपी की अधिक उम्र को देखते हुए अदालत ने उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।