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Jhansi: एमएसएमई मंत्रालय के पोर्टल में बदलाव को लेकर जिला उद्योग केंद्र ने शासन को लिखा पत्र

Tue, 23 Sep 2025 01:02 PM IST
दीपक महाजन संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी

सार

एमएसएमई ऋण से लेकर बैंकों के आवेदन पत्र तक अलग-अलग हैं। एमएसएमई इकाई लगाने से पहले उद्यमी ऋण की जानकारी करने के लिए एक से दूसरे बैंक का चक्कर काटता रहता है।
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यूपी सरकार के एमएसएमई मंत्री राकेश सचान। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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एमएसएमई ऋण से लेकर बैंकों के आवेदन पत्र तक अलग-अलग हैं। एमएसएमई इकाई लगाने से पहले उद्यमी ऋण की जानकारी करने के लिए एक से दूसरे बैंक का चक्कर काटता रहता है। अब जिला उद्योग केंद्र झांसी ने निदेशालय और इन्वेस्ट यूपी के एसीईओ को पत्र लिखकर एमएसएमई मंत्रालय के पोर्टल में बदलाव करने से लेकर कई सुझाव भी दिए हैं। इससे एमएसएमई ऋण वितरण की सटीक जानकारी भी हो सकेगी।
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जनपद स्तर पर वार्षिक क्रेडिट प्लान बनता है, जिसमें एमएसएमई क्षेत्र प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के अंतर्गत आता है। समय-समय पर इसकी समीक्षा भी होती है, लेकिन अग्रणी जिला प्रबंधक द्वारा प्रस्तुत किए गए एमएसएमई ऋण के आंकड़े स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) पोर्टल से लिए गए होते हैं। इससे यह स्पष्ट नहीं होता है कि एमएसएमई ऋण कितना और किस फर्म को दिया गया। इसके अलावा हर बैंक के एमएसएमई ऋण के लिए अलग आवेदन पत्र हैं और ब्याज की दर भी अलग-अलग है। एडवांस के लिए बैंकों की ओर से ली जाने वाली कोलैटरल गारंटी भी अलग-अलग है।

राष्ट्रीय स्तर पर एमएसएमई विभाग और प्रदेश स्तर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और निर्यात प्रोत्साहन विभाग व इसके अधीन क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत जिला उद्योग प्रोत्साहन से लेकर उद्यमिता विकास केंद्र तक के पास भी बैंक द्वारा दिए गए ऋण का कोई विवरण नहीं दिया जाता है। इन बिंदुओं का उल्लेख करते हुए उपायुक्त उद्योग मनीष चौधरी ने आयुक्त एवं निदेशक उद्योग और अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी इन्वेस्ट यूपी को पत्र लिखकर समाधान भी सुझाया है।
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समाधान का ये तरीका सुझाया

उपायुक्त उद्योग का कहना है कि एमएसएमई और भारी उद्योग को मिलने वाले ऋण के लिए यह अनिवार्य है कि उद्यम पंजीकरण अथवा आशय का पत्र बैंक अपने रिकॉर्ड में रखें यानी बैंक को अपने कोर बैंकिंग समाधान (सीबीएस) पर उद्यम पंजीकरण का विवरण भरना होता है। अगर बैंक भारत सरकार के उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल https://www.udyamregistration.gov.in/ पर ऋण का ब्योरा भर सकें तो समस्या का समाधान निकल सकता है। इस कार्य के लिए एमएसएमई मंत्रालय के पोर्टल पर व्यवस्था बनाने के लिए अनुरोध करना होगा।

इसके अलावा आरबीआई को भी एक सर्कुलर सभी बैंकों को जारी करना होगा, जिससे वो दिए गए ऋण का ब्योरा इस पोर्टल पर भरें। यह भी अनिवार्य करना होगा कि इस ब्योरा को उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर अंकित करने के बाद एक कोड प्राप्त हो, जिसको बैंक के सीबीएस पोर्टल पर दर्ज करने के बाद ही ऋण स्वीकृत/वितरण हो पाए।

ये व्यवस्था शुरू हो जाने पर उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर एक डाउनलोड लिंक उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र को उनकी यूजर आईडी तथा पासवर्ड पर मिल जाए। उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर एमएसएमई ऋण डाटा को डाउनलोड करने के लिए एसएलबीसी और अग्रणी जिला प्रबंधक को भी यूजर आईडी और पासवर्ड उपलब्ध करा दिए जाए तो एमएसएमई डाटा सटीक और प्रभावशाली साबित होगा।
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