करीब तीन माह पहले तक महानगर की स्ट्रीट लाइट के रखरखाव का जिम्मा संभालने वाली ईईएसएल कंपनी और नगर निगम में भुगतान को लेकर विवाद छिड़ गया। ईईएसएल ने नगर निगम पर भुगतान न करने का आरोप लगाते हुए शासन से शिकायत कर दी जबकि निगम अफसरों का तर्क है कि लापरवाही के चलते कंपनी को हटाया गया। ऐसे में उसकी ओर से दिए गए बिल की जांच कमेटी कर रही है।कमेटी की इजाजत के बाद ही उसे भुगतान हो सकेगा।
स्ट्रीट लाइट के रखरखाव के लिए शासन ने वर्ष 2017 में ईईएसएल कंपनी को यहां भेजा था। कंपनी को शिकायत मिलने के बाद 48 घंटे में लाइट सही करना था, लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी कंपनी इस तरह से काम नहीं कर पाई। कंपनी ने इसके लिए आवश्यक उपकरण तक नहीं खरीदे। निगम के वाहनों का कंपनी इस्तेमाल करती रही। कंपनी की कार्यशैली से पार्षदों में भी नाराजगी फैल गई। तमाम शिकायतें मिलने पर तत्कालीन नगर आयुक्त पुलकित गर्ग ने तीस लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इसके बाद भी कंपनी ने कामकाज नहीं सुधारा। इसके बाद नगर आयुक्त सत्य प्रकाश ने भी कंपनी पर लापरवाही के आरोप में 90 लाख का जुर्माना लगाया। कई अल्टीमेटम के बावजूद काम में सुधार न होने पर निगम ने तीन महीने पहले बाहर का रास्ता दिखा दिया।
कंपनी अब निगम से करीब 1.10 करोड़ रुपये मांग रही है। निगम प्रशासन यह रकम देने को राजी नहीं। नगर आयुक्त सत्य प्रकाश का कहना है कि अपर नगर आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। उसके फैसले पर ही भुगतान होगा।