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झांसी में कोरोना से हाहाकार, यहां भी घूम जाओ सरकार

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झांसी। प्रदेश के मुख्यमंत्री इन दिनों जिलों के दौरे पर हैं। खासतौर पर वह उन जनपदों में जा रहे हैं, जहां कोरोना वायरस के संक्रमण ने हाहाकार मचा रखा है और बदइंतजामी हावी है। ऐसे में झांसी की जनता की मुख्यमंत्री से दरकार है कि वह एक बार झांसी आकर यहां की हकीकत भी देख जाएं, ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया हो सकें।
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कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर के दस्तक देने के साथ ही झांसी में हाल बदहाल हो चले थे। मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या के आगे व्यवस्थाएं बौनी साबित होने लगीं। ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की सांसें थमने लगीं। रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी ने जोर पकड़ लिया था। मजबूरी में लोगों को एक-एक लाख रुपये तक इंजेक्शन खरीदे। ऐसे में नकली इंजेक्शन भी खपाए जाने लगे। अस्पताल में दाखिल होने के लिए मरीजों के परिजन गिड़गिड़ाते नजर आ रहे थे। मरीज मर रहे थे और परिजनों में कोहराम मचा हुआ था।
श्मशानघाटों में शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं बची थी। निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च कर मरीजों का इलाज कराना पड़ रहा है। सरकार द्वारा तय की गईं इलाज की दरों को ताक पर रख दिया गया है। कर्ज लेकर लोगों को अपनों का इलाज कराना पड़ रहा है। हर ओर हाहाकार की स्थिति मची हुई है। ऐसे में झांसी की जनता की दरकार है कि एक बार प्रदेश के मुखिया यहां आकर हालातों को अपनी आंखों से देख जाएं, शायद इससे स्थिति बेहतर होने में मदद मिल सके। वैसे भी मुख्यमंत्री उन सभी जिलों का दौरा कर रहे हैं, जहां कोरोना वायरस के संक्रमण ने कोहराम मचा रखा है और प्रशासनिक बदइंतजामी हावी है। जनता का मानना है कि ऐसे में मुख्यमंत्री को झांसी का दौरा भी जरूर करना चाहिए।
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कोरोना वायरस के संक्रमण ने झांसी में मचाई तबाही
- जिले में अब तक 34,656 हो चुके हैं संक्रमित, इनमें से 01 अप्रैल से 12 मई के दरम्यान 23,885 लोगों को ये महामारी ले चुकी है अपनी गिरफ्त में।
- अब तक कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आकर 438 संक्रमित गवां चुके हैं अपनी जान। इनमें से 01 अप्रैल से 12 मई के मध्य हुईं रिकॉर्ड 264 मौतें।
- जिले में एक-एक लाख रुपये तक में बिक गए रेमडेसिविर इंजेक्शन।
- नकली इंजेक्शन भी खपाए गए।
- निजी अस्पतालों में इलाज के लिए लोगों को करने पड़ रहे लाखों खर्च। कर्जदार तक हो गए लोग।
- किसी की ऑक्सीजन की कमी से सांसें टूटीं, तो किसी को समय पर नहीं मिल पाया वेंटिलेटर।
- श्मशानघाट तक हाउसफुल रहे। खुले आकाश के नीचे लाशों का किया गया अंतिम संस्कार।
- संक्रमितों को लेने के लिए न सरकारी एंबुलेंस आई और न ही छोड़ने के लिए। निजी एंबुलेंस संचालकों की भी जारी है मनमानी। जमकर वसूल रहे हैं किराया।
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