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अंदरूनी कलह से जूझ रही सपा, सार्वजनिक होने लगीं नेताओं की आपसी दूरियां

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झांसी। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने का सपना देख रही समाजवादी पार्टी में गुटबाजी चरम पर है। पार्टी के नेताओं की अंदरूनी दूरियां अब सार्वजनिक तौर पर नजर आने लगी हैं। विधानसभा चुनाव के लिए टिकट के लिए आवेदन मांगे जाने के बाद से इसे और हवा मिल गई है। इन हालातों को आगामी चुनाव की दृष्टि से शुभ संकेत नहीं माना जा रहा है।
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साल 2017 के विधानसभा चुनाव में खोई हुई प्रदेश की सत्ता को वर्ष 2022 में एक बार फिर से हासिल करने के लिए समाजवादी पार्टी सियासी तानाबाना बुनने में जुटी हुई है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इसके लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है। लेकिन, स्थानीय स्तर पर परिस्थिति एकदम इतर हैं। जिले में सपा के नेता आपसी गुटबाजी में उलझे हुए हैं। हालांकि, पहले ये गुटबाजी अंदरखाने तक सीमित थी, लेकिन अब सार्वजनिक तौर पर दिखाई देने लगी है। पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच भी ये चर्चा का विषय बनी हुई है। हालात ये हैं कि एक गुट द्वारा किए जाने वाले आंदोलन या अन्य किसी कार्यक्रम में दूसरे गुट के लोग नजर नहीं आते हैं। वहीं, दूसरे गुट के कार्यक्रमों में पहला गुट अपनी दूरी बनाए रखता है। सार्वजनिक तौर पर तो दोनों गुटों के लिए एकदूसरे पर टीका टिप्पणी करने से बचते हैं, परंतु अपनों के बीच भड़ास निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ते। विधानसभा टिकट की दावेदारी के बाद से हालात और भी बिगड़ गए हैं। ज्यादातर दावेदार अपने को पार्टी के शीर्ष नेताओं को करीबी बताते हुए कार्यकर्ताओं के बीच पहुंच रहे हैं और दूसरे दावेदारों पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
विदित हो कि 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जिले की चार में से दो विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन, 2017 के चुनाव में पार्टी को ये दोनों सीटें गंवानी पड़ गईं थीं। जानकारों का मानना है कि पार्टी नेताओं के बीच खींचतान यदि इसी तरह से जारी रहती है तो आगामी चुनाव में सपा को खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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टिकट के लिए आवेदन की तिथि बढ़ी
झांसी। समाजवादी पार्टी ने विधानसभा के प्रत्याशियों के चयन के लिए आवेदन मांगे थे। इसकी अंतिम तिथि 26 जनवरी निर्धारित की गई थी। इस तिथि तक जिले की चारों विधानसभाओं से पार्टी के 18 लोगों ने टिकट के लिए दावेदारी की थी। कई पार्टी नेताओं ने दो विधानसभा से टिकट के लिए आवेदन किया था। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अब आवेदन के लिए एक और मौका दिया है। आवेदन की तिथि बढ़ाकर 15 फरवरी कर दी गई है।
गुटबाजी समाजवादी पार्टी की परंपरा में नहीं रही है। सपा हमेशा से ही सबको साथ में लेकर चलती है। पार्टी के पुराने लोग नए साथियों का लगातार मनोबल बढ़ाने का काम करते हैं। सभी एक साथ मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
- डा. चंद्रपाल सिंह यादव, पूर्व सांसद
समाजवादी पार्टी एक है, गुटबाजी कोरी अफवाह है। ये अफवाह फैलाने का काम भाजपाई कर रहे हैं। पार्टी के नए लोगों को पुराने लोगों का पूरा मार्गदर्शन मिल रहा है। रही बात आंदोलन व कार्यक्रमों में नजर आने की, तो पार्टी नेतृत्व जिसे जो जिम्मेदारी देता है, वो अपना काम करता है।
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- महेश कश्यप, जिलाध्यक्ष - सपा
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