रातभर चला तेंदुए को पकड़ने का रेस्क्यू
जिसके पिछले पैर काम नहीं कर रहे थे जो चैकडेम की पुलिया में पनाह लिये था। जानकारी मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और प्रभारी डीएफओ के निर्देशन में देरशाम रेस्क्यू ऑपरेशन प्रारम्भ हो सका। बताया गया है कि पुलिया के दोनों ओर लोहे के पिंजरे रखकर रातभर तेंदुए को पिंजरे में लाने की कोशिश की गई, जिसके लिये तेंदुए पर पानी की तीव्र धारा छोड़ी गई, लंबे बांस में मशाल बांधकर डराया गया, खाने के लिये मुर्गे रखे गये फिर भी सफलता नहीं मिली।
ऐसे पकड़ा गया तेंदुआ
बृहस्पतिवार को तेंदुए को बेहोश करने के लिये ट्रेंकुलाइज करने का निर्णय लिया गया जिसके लिये कानपुर स्थित वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ नासिर भी मौके पर पहुंचे जिनकी सूझबूझ से तेंदुए को बगैर बेहोश किये पैर में रस्सी का फंदा डालकर उसे पिंजरे तक लाया गया। जनपद में वन्यजीवों की सुरक्षा एवं बचाव के लिये संसाधनों एवं प्रशिक्षित कार्मिकों की कमी होने के चलते घायल तेंदुए को सुरक्षित बचाने में काफी समय लग गया जिसके चलते तेंदुआ काफी तनाव में दिख रहा था।
दहाड़ों से रहा ग्रामीणों में भय का माहौल
पुलिया के नीचे छिपा तेंदुआ आसपास मानवीय गतिविधियां होने से रातभर दहाड़ता रहा। तेंदुए की तेज गर्जना से ग्रामीणों में भय का माहौल रहा। अगली दोपहर तेंदुए को पकड़े जाने की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों द्वारा चैन की सांस ली।
कानपुर भेजा गया घायल तेंदुआ
प्रभारी डीएफओ डॉ शिरीन ने बताया बचाया गया तेंदुआ नर है जिसकी उम्र लगभग साढ़े पांच वर्ष होगी उसे चिकित्सीय परीक्षण एवं उपचार हेतु कानपुर भेजा गया है, स्वस्थ होने और आवश्यक मानकों के आधार पर तेंदुए को किसी संरक्षित वनक्षेत्र अथवा चिड़ियाघर में रखा जायेगा।