विश्व अस्थमा दिवस पर विशेष
डॉ. मधुर्मय शास्त्री ने कहा, गोली और सीरप का असर न सिर्फ देरी से होता है बल्कि नुकसानदायक भी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अस्थमा न वायरस से होता है और न बैक्टीरिया से। यह बच्चे, युवा और बुजुर्ग किसी को अनुवांशिक या एलर्जी से हो सकता है। इस बीमारी से फेफड़ों के वायुमार्ग में सूजन आ आती है। इससे रोगी को सांस लेने में दिक्कत होती है। गोली व सीरप का असर न सिर्फ देरी से होता है बल्कि नुकसानदायक भी होता है। वहीं, इनहेलर रोगी को तुरंत राहत देता है। इसके साइट इफेक्ट भी न के बराबर होता है। यह फेफड़ों में मरहम का काम करता है।
मेडिकल कॉलेज के चेस्ट एवं रेस्परेट्री विभागाध्यक्ष डॉ. मधुर्मय शास्त्री ने बताया कि अस्थमा की वजह अनुवांशिक या एलर्जी है। एलर्जी किसी से भी हो सकती है, जो फेफड़ों को प्रभावित करती है। इससे वायुमार्ग में सूजन आने से पर्याप्त ऑक्सीजन फेफड़ों तक नहीं पहुंचती है। इससे रोगी की सांस फूलने लगती है। घरघराहट होने के साथ सीने में जकड़न होती है।
डॉ. शास्त्री ने बताया कि मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस है। इसकी थीम ‘इनहेल्ड उपचारों को सभी के लिए सुलभ कराएं’ है। उन्होंने बताया कि जब मुंह में इनहेलर दबाया जाता है तो दवा सीधे श्वास मार्ग और फेफड़े में पहुंचती है, जो मरहम का काम करती है। इसके इस्तेमाल से रोगी को अस्पताल में भर्ती करने की कम जरूरत पड़ती है। अस्थमा पीड़ित गर्भवती महिला इनहेलर का उपयोग कर सकती हैं। इससे गर्भस्थ शिशु को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है मगर डॉक्टर से परामर्श जरूरी है।
क्या होता है अस्थमा
फेफड़ों में हवा ले जाने वाली नलिकाओं में सूजन आने से सांस लेने में दिक्कत होती है। शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने से सांस फूलती है। घरघराहट और सीने में जकड़न होती है।