फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महंगाई की मार: बिगड़ गया घर का बजट, नहीं हो पा रही बचत

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। पेट्रोल-डीजल और खाद्य पदार्थों पर आई महंगाई ने हर घर का बजट बिगाड़ दिया है। त्योहार के सीजन में हर वस्तु के दाम में अचानक से आई तेजी से हर वर्ग परेशान है। एक मध्यमवर्गीय परिवार का करीब पांच हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च हो रहा है। एक साल पहले तक परिवारों को हो रही बचत अब बिल्कुल शून्य हो गई है। हालात यह हो गए हैं कि खाने-पीने से लेकर घूमने फिरने और पहनने-ओढ़ने के कपड़ों तक महंगाई की मार पड़ी हैं। दवाई से मिठाई तक हर चीज के दाम बढ़ गए हैं। किसी-किसी उत्पाद के दाम बढ़े हैं, तो किसी-किसी उत्पाद का वजन कम कर दिया है। ऐसे में हर आदमी घर के मासिक बजट को लेकर चिंतित है।
विज्ञापन

-------------
सब्जी-राशन के दामों में लगी आग
पेट्रोल पर आई महंगाई के चलते सब्जी और राशन सामग्री के दाम बढ़ गए हैं। टमाटर 60 तो प्याज 50 रुपये बिक रही है। आलू के दाम भी 20-40 रुपये के बीच हैं। इसके साथ ही रिफाइंड 140, तेल 175, आटा 350, चीनी 40 और दालों के दाम बढ़ गए हैं। बेसन, मैदा, सूजी के रेट भी बढ़े हैं। मसालों पर भी महंगाई है। सिलिंडर के दाम भी एक हजार रुपये के आसपास हैं। ऐसे में एक मध्यमवर्गीय परिवार का राशन पर होने वाला करीब 10 हजार का खर्च अब 13 हजार के आसपास पहुंच गया है। त्योहार पर घरों पकवान बनते हैं। ऐसे में अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा है।
------------
होटलों में खाना भी महंगा
पेट्रोल और सिलिंडर के दाम बढ़ने से होटल-ढाबों में खाना भी महंगा हो गया है। होटल संचालकों ने खाद्य पदार्थों के दाम 20 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं। इसके चलते पहले जहां एक मध्यमवर्गीय परिवार महीने में होटल-रेस्टोरेंट में खाने-पीने और घूमने पर ढाई हजार तक खर्च करता था। वह अब बढ़कर तीन हजार रुपये तक पहुंच गया है।
विज्ञापन

--------------
नाश्ते का जायका भी बिगड़ा
महंगाई ने नाश्ते तक को नहीं छोड़ा है। महानगर में ब्रेेड के दामों में पांच और मक्खन के दाम दो रुपये तक बढ़ गए हैं। इसके साथ ही समोसा पांच रुपये, बेढ़ईं तीन रुपये और कचौड़ी पर दो रुपये तक बढ़ गए हैं। इसके साथ ही मिठाई के दामों में भी इजाफा हुआ है। मिष्ठान्न विक्र्रे ताओं ने 10 फीसद तक रेट बढ़ाए हैं।
-------------
कम हो गया वजन
महंगाई के दौर में तमाम उत्पाद ऐसे हैं, जिनके दाम तो नहीं बढ़े हैं, लेकिन कंपनियों ने बढ़ी चालाकी से उत्पाद का वजन कम कर दिया है। करीब 75 रुपये का 200 ग्राम का टूथपेस्ट अब 175 ग्राम का रह गया है। कपड़े धोने के साबुन की टिकिया 280 ग्राम से घटकर 230 ग्राम पर आ गई है। डिर्टजेंट पाउडर, नहाने का साबुन, डियो, फिनाइल, शैंपू, फेश वॉश, डिशवॉश बार समेत तमाम उत्पादों का वजन कम कर दिया है। ऐसे में पहले जहां एक उत्पाद महीने भर चलता था, वह अब 20 दिन ही चल पा रहा है।
------------
ऐसे समझिए परिवार का बजट
परिवार की कुल आय- 25000
सामग्री पहले अब
राशन-दूध, सब्जी 9 हजार 13 हजार
सिलिंडर 700 एक हजार
पेट्रोल-डीजल 3000 5000
बाहर खाना पीना 2500 3000
मोबाइल रिचार्ज 1000 1200
अन्य 1500 2000
कुल 18700 25200
बचत 5300 -200
महंगाई सच में बेहिसाब बढ़ रही है। हर उत्पाद महंगा हो रहा है। नहीं तो उत्पाद वजन कम हो रहा है। अब तो हर महीने की बचत शून्य हो गई है।- दीपक पाठक
---------
हर महीने का बजट पांच हजार रुपये तक बढ़ गया है। हर चीज महंगी होती जा रही है। पहले महीने में बचत कर लेते थे। अब वह भी नहीं हो रही।- जयप्रकाश प्रजापति
------------
पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से सब कुछ महंगा हो गया है। पहले हर महीने पांच हजार तक बचा लेते थे। अब कुछ भी नहीं बच पाता है।- अश्वनी
---------
महंगाई ने सब कुछ खत्म कर दिया है। खाने-पीने के सामान पर ही इतनी महंगाई है कि अन्य सब चीजों के बारे में तो कुछ सोच ही नहीं सकते।- राज वाधबान
एक साल में खान पान और पेट्रोल-डीजल का खर्च 50 फीसदी तक बढ़ गया है। एक मध्यमवर्गीय परिवार की हर महीने की औसत आय 25 हजार तक मानें तो एक साल पहले उस परिवार का 3000 रुपये पेट्रोल और 7 से 10 रुपये खानपान और राशन, सब्जी पर खर्च होता था। अब वह बढ़कर क्र मश: पेट्रोल 5000, खानपान 10-13 हजार हो गया है। इससे लोगों की बचत पर असर पड़ा है।
विज्ञापन

डॉ. राधिका चौधरी, असिस्टेंट प्रोफेसर, इकोनोमिक्स और फाइनेंस विभाग, बीयू
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें