अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। यदि सांप ने काट लिया है तो संयम रखें। हड़बड़ी से पीड़ित की हार्ट बीट बढ़ती है, जिससे जहर तेजी से शरीर में फैलता है। जिस अंग में सांप ने काट लिया है, उसे चलाएं नहीं। न रस्सी बांधें और न चीरा लगाकर जहर निकालने का प्रयास करें। इससे पीड़ित की जान खतरे में पड़ सकती है। यह बात सोमवार को बीयू के जंतु विज्ञान विभाग में ‘सर्पदंश मृत्यु विहीन भारत’ विषय पर आयोजित सेमिनार में महर्षि दयानंद सरस्वती विवि अजमेर के पूर्व कुलपति प्रो. कृष्ण कुमार शर्मा ने कही।
मुख्य वक्ता प्रो. शर्मा ने बताया कि सर्पदंश से तीव्र जलन, नींद सी जाना, अवसाद, मिचली, उल्टी, अनैच्छिक मल-मूत्र-त्याग, अंगघात मुख्य लक्षण हैं। जब शरीर में जहर फैल जाता है, तो सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। प्राथमिक उपचार के रूप में दंश वाले स्थान के कुछ ऊपर और नीचे हल्के से रबर या कपड़े से बांधे ताकि नसों में खून का प्रवाह धीमा हो, रुके नहीं। झांड़-फूंक से बचें और जल्द से जल्द निकटतम अस्पताल लेकर जाएं।
प्रो. अशोक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सर्पदंश के प्रति जागरुकता ही जीवन बचाती है। इस दौरान सर्प शिक्षा अभियान के प्रदेश कोऑर्डिनेटर डॉ. अनिल बाबू, डीन साइंस प्रो. आरके सेनी, डॉ. सचिन उपाध्याय, डॉ. सत्यवीर सिंह, डॉ. कौशल त्रिपाठी, डॉ. धीरेन्द्र शर्मा, डॉ. पूनम मेह्लोत्रा, डॉ. गौरव निगन, डॉ. आशुतोष दिवाकर, डॉ. देवेन्द्र मणि त्रिपाठी, डॉ. सर्वेन्द्र विक्रम, डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. अमित तिवारी, डॉ. अनिल बाबू, डॉ. धर्मपाल आदि उपस्थित रहे।
0- सांप को पकड़ने के मिथक से बचें
प्रो. कृष्ण कुमार शर्मा ने बताया कि यह मिथक हैं कि सांप को पकड़कर डॉक्टर को दिखाएंगे तो सही उपचार मिलेगा। हकीकत है कि एंटी स्कैन वैनम (एएसवी) चार सर्वाधिक जहरीले सांपों के जहर को मिलाकर घोड़े को लगाया जाता है। इसके बाद घोड़े के खून से एएसवी बनता है, जिससे हर सांप के काटने का इलाज संभव है।
0- सर्पदंश के बाद क्या करें
जहां सांप ने काटा है, उस जगह को एंटीसैप्टिक, साबुन, डिटोल आदि से धोएं।
पीड़ित को जल्द उपचार दिलाने का ढांढ़स बंधाएं ताकि हार्ट बीट न बढ़े।
जिस अंग में काटा है, उसे हिलाए-डुलाएं नहीं
0- सर्पदंश के बाद क्या नहीं करना चाहिए
चीरा लगाकर विष को चूसकर निकालने का प्रयास न करें
किसी ओझा, तांत्रिक या झाड़-फूंक में समय नहीं गंवाएं
सर्प को ढूंढने और पकड़ने में समय बर्बाद न करें