झांसी। राज्यपाल एवं कुलाधिपति राम नाईक ने कहा कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय के सपनों का भारत बनाने के लिए सभी देशवासियों को मिलकर कार्य करना चाहिए। पंडित जी अटल, महाजन जैसे वक्ता तो नहीं थे लेकिन उनमें लोगों तक अपनी बात पहुंचाने की विशेषता थी। विचारों के अनुकूल ही उनका व्यवहार होता था। उन्होंने कभी अंधविश्वास और कुरीतियों का समर्थन नहीं किया। राज्यपाल शुक्रवार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में ‘पंडित दीन दयाल के सपनों का भारत’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना काल का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय देश में भूमि सुधार की चर्चा चल रही थी। 1952 के पहले चुनाव मे राजस्थान में जनसंघ के सात विधायक चुनकर आए। जनसंघ ने इस मुद्दे पर विपक्ष में होकर भी सरकार की समर्थन का एलान किया, लेकिन विधानसभा में जब चर्चा की स्थिति आई तो छह विधायक इस पर समर्थन से मुकर गए।
इस मुद्दे के समाधान के लिए पंडित जी को भेजा गया। इस दौरान बैठक बुलाए जाने पर जब छह विधायक नहीं आए तो उनको पार्टी से निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार और व्यवहार स्पष्ट था। वह गरीबों के हितैषी व चिंतक थे।
एमएलसी हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि पंडित दीनदयाल जी ऐसा भारत चाहते थे जिसमें पूरा देश एकात्म हो। उन्होंने कहा कि पश्चिमी संस्कृति हमारी संस्कृति से सर्वथा अलग है। हम अपने देश को माता मानते हैं और पश्चिम के लोग बड़ा बाजार। देश भर में इन दिनों गर्माये असहिष्णुता के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कुछ गिने चुने लोग यह प्रचारित करने में जुटे हैं कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है, जबकि भारत का माहौल ऐसा कभी हो ही नहीं सकता। उन्होंने कहा विचार की स्वतंत्रता का ऐसा माहौल पूरी दुनिया में कहीं नहीं है।
विशिष्ट अतिथि पैसिफिक विश्वविद्यालय उदयपुर के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने बताया कि 2020 तक विभिन्न औद्योगिक देशों में कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने पर नौकरियों में 5.70 करोड़ लोगों का जन अभाव हो जाएगा। इसमें 4.30 करोड़ की पूर्ति भारत करेगा। उन्होंने कहा कि निर्यात कम होने से हर साल देश को 150 अरब डॉलर का नुकसान होता है।
मुख्य वक्ता प्रो. अशोक मोडक ने कहा कि दीनदयाल जी भारतीय ऋषि परंपरा के वाहक थे। यदि हम चाहते हैं कि अफ्रीकी देशों में चीन का वर्चस्व न बढ़े तो हमें पंडित जी के एकात्म मानववाद की खूबियां उन्हें बतानी हाेंगी। राज्य संकल्पना के बारे में भी उनके विचारों पर अमल करना होगा।
बीयू प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने ह्यूमन डेवलपमेंट इनडेक्स (एचडीआई) के विभिन्न बिंदुओं पर मंथन करने पर बल दिया। उन्हाोने कहा कि जिन देशों में एचडीआई सूचकांक आठ या नौ है, वहां के लोग भी डिप्रेशन का शिकार हैं और आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने इसके आधार बिंदुओं में सांस्कृतिक मूल्यों को शामिल करने की बात कहते हुए राज्यपाल समेत सभी का कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आभार जताया।
कार्यक्रम में संगोष्ठी से संबंधित स्मारिका व पंडित उपाध्याय से संबंधित पुस्तिका का विमोचन किया गया। इस दौरान मेयर किरण वर्मा, पं. विश्वनाथ शर्मा, पूर्व मंत्री रवींद्र शुक्ल, संजीव श्रंगीऋषि, डॉ. सरिता पांडेय, संगोष्ठी के संयोजक प्रो. एमएल मौर्या, प्रो. पंकज अत्री, प्रो. ओपी कंडारी, प्रो. सुनील काबिया, प्रो. एसपी सिंह, प्रो. अपर्णा राज, प्रो. रोचना श्रीवास्तव, डॉ. एमएम सिंह, डॉ. यशोधरा शर्मा, ई. राहुल शुक्ला, डॉ. राजीव सेंगर, डॉ. रश्मि सिंह, डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. धीरेंद्र यादव, डॉ. अंकित श्रीवास्तव, डॉ. ममता सिंह, डॉ. जाकिर अली, ई. सादिक खान, डॉ. संतोष पांडेय, प्रदीप यादव, डॉ. सीपी पैन्यूली, उमेश शुक्ल, अनिल बोहरे, विवेक अग्रवाल, अतुल खरे मौजूद रहे।
दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. बीपी शर्मा व तीसरे सत्र की अध्यक्षता प्रो. राजवीर शर्मा ने की। इस सत्र में प्रो. वेदप्रकाश त्रिपाठी और स्वदेशी जागरण मंच के अजय कुमार ने विचार रखे।
देश में असहिष्णुता बढ़ने का हो रहा दुष्प्रचार : हृदय नारायण
झांसी। देश भर में इस समय गर्माये असहिष्णुता के मुद्दे पर एमएलसी हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि यह एक दुष्प्रचार है कुछ लोग यह प्रचारित करने में जुटे हैं कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है, जबकि भारत का माहौल ऐसा कभी नहीं हो सकता। भारत में वैचारिक स्वतंत्रता जैसा माहौल पूरी दुनिया में कहीं नहीं है।
पश्चिमी संस्कृति हमारी संस्कृति से सर्वथा अलग है। हम अपने देश को माता मानते हैं और पश्चिम के लोग बड़ा बाजार। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में पंडित दीन दयाल के सपनों का भारत विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल एक ऐसा भारत चाहते थे जिसमें पूरा देश एकात्म हो।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि पैसिफिक विश्वविद्यालय उदयपुर के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने बताया कि 2020 तक विभिन्न औद्योगिक देशों में कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने पर नौकरियों में 5.70 करोड़ लोगों का जन अभाव हो जाएगा। इसमें 4.30 करोड़ की पूर्ति भारत करेगा। उन्होंने कहा कि निर्यात कम होने से हर साल देश को 150 अरब डॉलर का नुकसान होता है।
मुख्य वक्ता प्रो. अशोक मोडक ने कहा कि दीनदयाल जी भारतीय ऋषि परंपरा के वाहक थे। यदि हम चाहते हैं कि अफ्रीकी देशों में चीन का वर्चस्व न बढ़े तो हमें पंडित जी के एकात्म मानववाद की खूबियां उन्हें बतानी हाेगी। राज्य संकल्पना के बारे में भी उनके विचारों पर अमल करना होगा।
बीयू प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने ह्यूमन डेवलपमेंट इनडेक्स (एचडीआई) के विभिन्न बिंदुओं पर मंथन करने पर बल दिया। उन्हाेने कहा कि जिन देशों में एचडीआई सूचकांक आठ या नौ है, वहां के लोग भी डिप्रेशन का शिकार हैं और आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने इसके आधार बिंदुओं में सांस्कृतिक मूल्यों को शामिल करने की बात कहते हुए राज्यपाल समेत सभी का कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आभार जताया।
कार्यक्रम में संगोष्ठी से संबंधित स्मारिका व पंडित उपाध्याय से संबंधित पुस्तिका का विमोचन किया गया। इस दौरान मेयर किरण वर्मा, पं. विश्वनाथ शर्मा, पूर्व मंत्री रवींद्र शुक्ल, संजीव श्रंगीऋषि, डॉ. सरिता पांडेय, संगोष्ठी के संयोजक प्रो. एमएल मौर्या, कुलसचिव पीएन प्रसाद, प्रो. पंकज अत्री, प्रो. ओपी कंडारी, प्रो. सुनील काबिया, प्रो. एसपी सिंह, प्रो. अपर्णा राज, प्रो. रोचना श्रीवास्तव, डॉ. एमएम सिंह, डॉ. यशोधरा शर्मा, ई. राहुल शुक्ला, डॉ. राजीव सेंगर, डॉ. रश्मि सिंह, डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. धीरेंद्र यादव, डॉ. अंकित श्रीवास्तव, डॉ. ममता सिंह, डॉ. जाकिर अली, ई. सादिक खान, डॉ. संतोष पांडेय, प्रदीप यादव, डॉ. सीपी पैन्यूली, उमेश शुक्ल, अनिल बोहरे, विवेक अग्रवाल, अतुल खरे मौजूद रहे।
दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. बीपी शर्मा व तीसरे सत्र की अध्यक्षता प्रो. राजवीर शर्मा ने की। इस सत्र में प्रो. वेदप्रकाश त्रिपाठी और स्वदेशी जागरण मंच के अजय कुमार ने विचार रखे।