झांसी/उरई/बांदा/हमीरपुर। बुंदेलखंड में सूखे की हकीकत का पता लगाने बृहस्पतिवार को केंद्रीय टीम बुंदेलखंड में पहुंच गई है। टीम ने पहले दिन जालौन, हमीरपुर और बांदा का दौरा किया। टीम ने माना कि सूखे से 80 फीसदी फसल बर्बाद हो गई है।
सुबह शताब्दी एक्सप्रेस से भारत सरकार के आपदा प्रबंधन, कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय के निदेशक अतुल पटने की अगुवाई में बुंदेलखंड में सूखे की हकीकत का पता लगाने झांसी पहुंची टीम सीधे उरई के लिए रवाना हो गई। यहां अमर उजाला से बातचीत में निदेशक ने बताया कि सूखे से संबंधित रिपोर्ट अब तक राज्य सरकार ने नहीं भेजी है, केंद्र सरकार अपने स्तर से इस क्षेत्र का सर्वे करा रही है। इसमें किसानों की माली हालत, खेती किसानी की स्थिति और सूखे आदि का पूरा आंकलन होगा। उरई में निदेशक ने कलेक्ट्रेट में अधिकारियों व किसानों के साथ बैठक की।
जालौन से टीम हमीरपुर पहुंची। यहां पहले टीम ने कुरारा विकास खंड के सरसई गांव का जायजा लिया। गांव से 50 से अधिक किसानों से सूखे की जानकारी ली। इसके बाद टीम ने झलोखर और सुमेरपुर विकासखंड के चंदौखी गांवाे में किसानों से वार्ता की। इस दौरान टीम के अधिकारी ने बताया कि यहां करीब 80 फीसदी फसलों को नुकसान हुआ है।
शुक्रवार को केंद्रीय टीम बांदा व चित्रकूट जनपद का भ्रमण करने के बाद झांसी आएगी।
सभी जिलों के अफसरों के साथ बैठक करेगी। इस दौरान किसान नेता टीम को प्रवास सोसायटी की क्षेत्र के हालातों पर तैयार की गई रिपोर्ट केंद्रीय टीम को सौंपेंगे। रिपोर्ट में खराब मौसम के चलते बांदा से 7.37 लाख, चित्रकूट से 3.44 लाख, महोबा से 2.97 लाख, हमीरपुर से 4.17 लाख, उरई से 5.38 लाख, झांसी से 5.58 लाख और ललितपुर से 3.81 लाख किसान और कामगारों के पलायन के आंकड़े सामने आए हैं।
साथ ही बुंदेलखंड के किसानों पर तकरीबन छह अरब रुपये का सरकारी कर्ज बताया गया है। शुक्रवार (आज) को झांसी में अधिकारियों के साथ सूखे को लेकर बैठक होगी। तदुपरांत, सायंकाल टीम शताब्दी एक्सप्रेस से दिल्ली के लिए रवाना हो जाएगी।