अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की हिरासत से मुफ्ती को छुड़ाने के मामले में नामजद 11 एवं 100 अज्ञात आरोपियों में पुलिस एक साल बाद भी सिर्फ नौ के खिलाफ ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर सकी। दो नामजद समेत अज्ञात अब तक तलाशे नहीं जा सके। अन्य आरोपियों की चार्जशीट दाखिल न हो सकने से कोर्ट में इसकी सुनवाई भी आरंभ नहीं हो सकी है।
पिछले साल 12 दिसंबर को एनआईए टीम झांसी पहुंची थी। आतंकी गतिविधियों में विदेशी फंडिंग के संदेह में उसने मदरसा शिक्षक से घंटों पूछताछ की थी। मुफ्ती से पूछताछ के लिए टीम ने जब उसे अपने साथ ले जाने की कोशिश तब वहां जमा भीड़ ने हंगामा शुरू कर दिया था। कुछ देर के लिए मुफ्ती को एनआईए टीम के हाथों से छुड़ाने का आरोप है। तत्कालीन कोतवाल शैलेंद्र सिंह ने भारतीय न्याय संहिता की आठ विभिन्न धाराओं में साकिर उर्फ पप्पू, गोल्डी, परवेज, जकरया, छोटी मस्जिद का इमाम अब्दुल हमीद, गुफरान, मोनिस, कामिल, तारिक, इकराम एवं शाबिर मकरानी समेत 100 अज्ञात के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
13 दिसंबर को मामले की विवेचना नवाबाद थाने के निरीक्षक अतुल कुमार को सौंप दी गई। शुरुआती पर्चे कटने के बाद 26 दिसंबर को विवेचना तत्कालीन नवाबाद थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह के पास पहुंच गई। उन्होंने प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ, सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल समेत बयान दर्ज करने के बाद 11 अप्रैल को इकराम एवं शाबिर मकरानी को छोड़ अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी लेकिन सात महीने बाद अब तक इन दोनों आरोपियों को पुलिस पहचान नहीं सकी। अज्ञात भी अब तक पहचाने नहीं जा सके। सीओ सिटी लक्ष्मीकांत गौतम का कहना है कि छानबीन चल रही है। कई अहम साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।