अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम के दौरान झांसी समेत बुंदेलखंड के किलों का जिक्र करते हुए इन्हें संस्कृति का प्रतीक बताया। उन्होंने देशवासियों से इन किलों की यात्रा करने की अपील करते हुए इनके जरिये इतिहास को जानने की बात कही। पीएम के बुंदेलखंड के किलों के बारे में चर्चा करने से यहां पर्यटक उद्योग को भी पंख लगने की उम्मीद जगी है। टूर एवं ट्रेवल्स समेत होटल कारोबारियों को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री के भी बुंदेलखंड के किलों के बारे में चर्चा करने से निश्चित तौर पर यहां पर्यटक आएंगे।
बुंदेलखंड में बुंदेला, चंदेल आदि राजघरानों ने ऐतिहासिक किले, गढ़ी समेत कई इमारतों का निर्माण कराया। बलुआ पत्थर से बने होने की वजह से सैकड़ों साल बाद भी इन इमारतों का वजूद कायम है। झांसी में ही आजादी की लड़ाई का केंद्र रहे महारानी लक्ष्मीबाई का किला, बरुआसागर किले समेत कई ऐतिहासिक इमारतें एवं किले हैं। इसी तरह दतिया, ओरछा, तालबेहट स्थित राजा मर्दन सिंह का किला समेत कई किले आज भी अपने में इतिहास समेटे खड़े हैंं। हालांकि बेहद दूरदराज में होने से इन तक पहुंच पाना भी आसान नहीं होता।
Iबुंदेलखंड में तमाम ऐतिहासिक इमारते हैं। इन्हें विकसित करने की जरूरत है। इससे यहां पर्यटन बढ़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात में बुंदेलखंड के किलों का जिक्र करने से यहां पर्यटकों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है।
- चंदर सोनी टूर एवं ट्रेवल्स, ऑपरेटरI
Iउप्र एवं मप्र के बुंदेलखंड को मिलाकर एक टूरिस्ट सर्किट बनाए जाने की आवश्यकता है। इस सर्किट के बनने से पर्यटकों की आवाजाही तेज होगी। पर्यटन को बढ़ाने के लिए कनेक्टिविटी भी बेहतर करने की आवश्यकता है। - सुरेंद्र विक्रम सिंह, होटल कारोबारीI
Iयह पहल आने वाले समय में बुंदेलखंड के लिए न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभदायक सिद्ध होगा बल्कि देश की युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और इतिहास से भी जोड़ने का काम करेगा। - हिमांशु दुबे, प्रदेश मीडिया सह प्रभारी भाजपाI
झांसी में मौजूद हैं यह ऐतिहासिक महत्व के किले एवं गढ़ियां
महारानी लक्ष्मीबाई का किला
बौना चोर का किला, बौंडा
टहरौली का किला
ठकुरपुरा की गढ़ी
अम्मरगढ़ का किला
डिमरौनी की गढ़ी
गुसाइयों का किला
बुनकरों की गढ़ी
लोहागढ़ किला
गुरसराय का किला
बरुआसागर किला
मन की बात में पीएम ने कही ये बातें
उत्तर प्रदेश के बांदा में है, कालिंजर किला। महमूद गजनवी ने कई बार इस किले पर हमला किया और हर बार असफल रहा। बुंदेलखंड में ऐसे कई किले हैं - ग्वालियर, झांसी, दतिया, अजयगढ़, गढ़कुंडार, चंदेरी। ये किले सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं हैं, ये हमारी संस्कृति के प्रतीक हैं। संस्कार और स्वाभिमान, आज भी इन किलों की ऊंची-ऊंची दीवारों से झांकते हैं। मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं, इन किलों की यात्रा करें, अपने इतिहास को जानें, गौरव महसूस करें।