झांसी। मानसून सीजन में सांपों का प्रजनन काल होने की वजह से सर्पदंश के मामले तेजी से सामने आने लगे हैं। जून में 60 से ज्यादा लोगों को सांप ने डसा है। इसी वजह से अप्रैल की तुलना में जून में 33 गुना अधिक एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन की मांग बढ़ी है।
मानसूनी सीजन में बारिश होने की वजह से सांपों के बिलों में पानी जाता है। इस वजह से सांप बिलों से निकलना शुरू हो जाते हैं। बारिश के महीने में ही इनका प्रजनन होता है। जब सांप मादा के साथ जोड़े में रहते हैं तो वह अपने आसपास किसी का भी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करते हैं। वह काफी आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए पास आने वाले जानवर व इंसान को काटने के लिए दौड़ पड़ते हैं। इसी वजह से जून में सर्पदंश के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। पिछले महीने 60 से ज्यादा लोगों को सांप ने कांटा है। इस कारण मेडिकल कॉलेज में एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन की खपत बढ़ी है। जून में 670 इंजेक्शन लगाए गए हैं। वहीं, जिला अस्पताल में इस साल एक भी मरीज सांप काटने के बाद एएसवी इंजेक्शन लगाने नहीं आया है।
अस्पताल ले जाएं, बच जाएगी जान
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. रामबाबू ने बताया कि 60 प्रतिशत सांप जहरीले नहीं होते हैं। ऐसे में सांप काटे तो तुरंत अस्पताल पहुंचें। अस्पताल में मरीज को डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाता है। इस दौरान देखा जाता है कि सांप के जहर के लक्षण आ रहे हैं या नहीं। जिसमें लक्षण आते हैं, उनको इंजेक्शन देना शुरू कर देते हैं। दस वॉयल एक साथ लगा देते हैं। कई मरीजों को 20 इंजेक्शन भी लगते हैं। उन्होंने बताया कि जब जहर का असर होता है तो व्यक्ति की आंख की पलक झुकने लगती हैं, वो उन्हें उठा नहीं पाता है। गले की मांसपेशियां शिथिल पड़ जाती हैं। पानी पीने पर नाक से निकल जाता है। सांस कमजोर पड़ने लगती है।
ये हैं आंकड़े
माह इंजेक्शन लगे
अप्रैल 20
मई 100
जून 670
(नोट: मेडिकल कॉलेज में ये इंजेक्शन लगाए गए हैं।)