झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में सुविधाएं बढ़ाने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दरकार है। कैंसर रोगियों को सिकाई के लिए बड़े-बड़े महानगरों की तरफ दौड़ लगानी पड़ती है। दूसरी तरफ, एमआरआई मशीन भी ‘लड़खड़ा’ रही है। यहां पर यूपी, एमपी के बुंदेलखंड सहित आसपास के 15 जिलों के मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं।
प्रदेश सरकार 16 जिलों में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी में है। मगर पहले से ही खुले मेडिकल कॉलेज में जनता कई सुविधाएं शुरू होने की आस लगाए हुए है। चूंकि, बुंदेलखंड में तंबाकू का सेवन होने की वजह से कैंसर रोगी खूब पाए जाते हैं। रोगियों को सिकाई की भी जरूरत पड़ती है। ऐसे में यहां पर कोबाल्ट मशीन नहीं होने की वजह से सिकाई कराने वाले मरीजों को दूसरे महानगरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में 0.2 टेस्ला की एमआरआई मशीन मशीन है। जबकि, इन दिनों थ्री टेस्ला की मशीन आ रही है। इससे कहीं ज्यादा सटीक रिपोर्ट आती है, साथ ही जांच के दौरान समय भी कम लगता है। एक दशक से भी ज्यादा पुरानी मशीन हो जाने की वजह से ये अक्सर खराब पड़ी रहती है। प्राइवेट में पांच हजार से भी ज्यादा शुल्क लगने के कारण ये जांच कराना हर किसी के बस में नहीं होता है।
पैथोलॉजी में आईएल-6 की दरकार
मेडिकल कॉलेज की पैथालॉजी में भी नई मशीनों की दरकार है। यहां आईएल-6 जांच के लिए मशीन की जरूरत है। इससे 300-400 प्रकार की जांचें हो सकती हैं। कॉलेज आने वाले मरीजों को इस जांच के लिए निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर जाना पड़ता है। आईएल-6 जांच का खर्च दो से तीन हजार रुपये आता है। कोविड की दूसरी लहर में मेडिकल कॉलेज ने एक हजार से ज्यादा मरीजों की ये जांच बाहर से कराई।
डेंटल विभाग में दांत ही उखड़ पाते
मेडिकल कॉलेज में सबसे खराब स्थिति डेंटल विभाग की है। यहां पर दांत निकलवाने और उनकी सफाई करने का ही काम होता है। आरसीटी से लेकर टेढ़े-मेढ़े दांतों को सीधा करने की व्यवस्था नहीं है। आईओपी तक की सुविधा नहीं है। जबकि, इन दिनों छोटे से लेकर बड़ों तक को दांतों से जुड़ी तमाम समस्याएं हो रही हैं।
कैथ लैब बंद, हार्ट स्पेशिलिस्ट नहीं
मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में कैथ लैब बंद पड़ी हुई है। कोरोना के मरीजों का इलाज इसी बिल्डिंग में चलने की वजह से ह्रदय मरीजों को इसकी सुविधा नहीं मिल पाई। अब कोरोना के केस कम हुए तो हार्ट स्पेशिलिस्ट न होने से इसका संचालन करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में ह्रदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती की जरूरत है।
रोजाना नहीं होती है ईको जांच
मेडिकल कॉलेज में रोजाना मेडिसिन, सर्जरी, गायनी विभाग 30 से 40 मरीजों को ईको जांच कराने के लिए पर्चे पर लिखकर देता है। मगर यहां पर सप्ताह में एक या दो बार ही इसकी जांच होती है। बाहर 1200-1500 की जांच होती है। ऐसे में ये जांच रोजाना होनी की जरूरत है।
नई कोबाल्ट मशीन के लिए प्रयास किया जा रहा है। 500 बेड अस्पताल में थ्री टेस्ला की एमआरआई मशीनें आई हैं। इसके अलावा भी कई जांचें शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।