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बुंदेलखंड में छात्रों में बीएड कर शिक्षक बनने की ललक फिर बढ़ी

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झांसी। बुंदेलखंड के छात्र-छात्राओं में बीएड कर शिक्षक बनने की ललक फिर बढ़ गई है। पिछले चार साल में बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की संख्या चार गुना बढ़ी है। इस बार बुंदेलखंड में 20,312 परीक्षार्थियों ने बीएड की प्रवेश परीक्षा दी है।
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वर्ष 2017 और 2018 में बीएड डिग्रीधारियों की जगह बीटीसी प्रमाणपत्र धारकों को प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति देने का शासनादेश हो गया था। इसके बाद छात्रों में बीएड के प्रति रुझान एकदम से घट गया था। 2018 में बुंदेलखंड में महज साढ़े पांच हजार अभ्यर्थियों ने बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए फॉर्म भरा था और साढ़े चार हजार परीक्षार्थी ही शामिल हुए थे। 2019 में बीएड वालों को फिर से प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति देने का आदेश होने के बाद इसकी डिग्री लेने वालों का रुझान लगातार बढ़ने लगा। इस साल बुंदेलखंड में 22 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने बीएड की परीक्षा के लिए फॉर्म भरा था, जिसमें 20 हजार से ज्यादा परीक्षार्थी शामिल हुए। इससे साफ है कि पिछले चार सालों में बुंदेलखंड में बीएड की परीक्षा देने वालों की संख्या चार गुना तक बढ़ गई है।
पिछले पांच वर्षों में ये रही स्थिति
वर्ष आवेदन परीक्षा दी
2017 14500 13218
2018 5505 4517
2019 17291 16004
2020 15482 12223
2021 22699 20307
2022 22346 20312
2017, 2018 में बीएड डिग्रीधारकों की जगह प्राथमिक विद्यालयों में सिर्फ बीटीसी प्रमाणपत्र धारकों को ही नियुक्त देने का शासन से आदेश हो गया था। इससे बीएड के प्रति रुझान कम होने लगा। पिछले तीन साल पहले फिर शासनादेश हुआ और प्राथमिक विद्यालयों में बीएड करने वालों को शिक्षकों की नियुक्ति मिलने का रास्ता साफ हो गया। इससे बीएड का क्रेज फिर बढ़ने लगा है। - डॉ. सुनील त्रिवेदी, समन्वयक, शिक्षा संस्थान, बीयू।
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