झांसी। सियासी रसूख के बल पर गुलशन यादव ने आहिस्ता आहिस्ता अपना एक बड़ा साम्राज्य बना लिया। 2012 में उसने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि नगर निगम के एक जरा से प्लाट पर कब्जा करने के बाद पूरे इलाके पर ही काबिज होता चला गया। यह अफसरों की जानकारी में भी था लेकिन किसी ने हाथ डालने की हिम्मत नहीं की। नगर निगम की जमीन पर ही 90 भैंसों की डेयरी खोल ली। बगल में शानदार कोठी बना ली लेकिन अधिकारी खामोश ही रहे।
गुलशन यादव ने 2012 में सपा के टिकट पर पार्षद बनकर सियासत में एंट्री की थी। 2014 में नगर निगम में उपसभापति बन गया। उस वक्त गुलशन ने सियासी लोगों से अपने अच्छे रिश्ते बना लिए। हालात ऐसे हो गए थे कि उसके घर पर बड़े बड़े नेताओं का आना जाना शुरू हो गया। बस इसी का फायदा उठाते हुए वह जमीनों पर कब्जे करता चला गया। ऐसा नहीं है कि अफसरों को इसकी जानकारी न हो लेकिन वह हाथ बांधे रहे। कहा तो यहां तक जाता है कि उस दौरान पुलिस और प्रशासनिक अफसरों से भी अच्छे रिश्ते हो गए थे गुलशन यादव के। अब जब 7 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ झांसी में आए तब उनके सामने यह प्रकरण गूंजा। इस पर मुख्यमंत्री ने अफसरों को फटकार लगाते हुए तत्काल कब्जाई गई भूमि को खाली कराने का आदेश जारी किया। लिहाजा अब नगर निगम ने एक हजार वर्ग फुट में किए गए कब्जे को मुक्त कराया।
दस साल में 15 नोटिस दिए निगम ने
झांसी। अगर नगर निगम के अफसरों की मानें तो वह लगातार नोटिस भेज रहे थे मगर वह नजरअंदाज करता रहा। 15 नोटिस जारी किए गए। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब नोटिस का जवाब नहीं मिल रहा था तो ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की क्यों नहीं गई। इन सवालों का जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है।