वीरांगना की नगरी से हिंदी सेवा की मुहिम अंतरराष्ट्रीय फलक पर शुरू हो गई है। झांसी में गठित अंतरराष्ट्रीय संस्था हिंदी साहित्य भारती ने देश के नामचीन कवि श्रीकृष्ण सरल के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आनलाइन परिचर्चा आयोजित की। आयोजन संस्था की छत्तीसगढ़ इकाई ने किया। इसमें भारत समेत विश्व के कोने-कोने से तीन सौ हिंदी प्रेमियों ने सहभागिता की। 17 देशों के बाद अब संस्था ने चीन समेत दस अन्य देशों में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए संयोजक बनाए गए हैं। इनमें शीर्ष शिक्षाविद, समाजसेवी, उद्यमी शामिल हैं। देश में भी 22 प्रदेशों में राज्य स्तरीय समिति घोषित हो चुकी हैं।
शहीदों, क्रांतिकारियों को समर्पित है श्रीकृष्ण ‘सरल’ का लेखन
श्री कृष्ण सरल एक नामचीन भारतीय कवि हैं। उनका जन्म 1 जनवरी 1919 को मध्य प्रदेश के गुना जिले के अशोक नगर में हुआ। देहांत 1 सितंबर 2000 को हुआ। भारतीय क्रांतिकारियों पर उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखीं जिनमें पंद्रह महाकाव्य हैं। उन्होंने लेखन में कई विश्व कीर्तिमान स्थापित किए हैं। सर्वाधिक क्रांति लेखन और सर्वाधिक महाकाव्य (पंद्रह) लिखने का श्रेय उनको जाता है। इनके पिता का नाम भगवती प्रसाद और माता का नाम यमुना देवी था।
वे शासकीय शिक्षा महाविद्यालय उज्जैन में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रहे। वे खुद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे और सेवानिवृत्ति के बाद आजीवन साहित्य साधना में रत रहे। उन्हें विभिन्न संस्थाओं द्वारा भारत गौरव, राष्ट्र कवि, क्रांति कवि, क्रांति रत्न, अभिनव भूषण, मानव रत्न, श्रेष्ठ कला आचार्य आदि अलंकरणों से विभूषित किया गया। राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन से प्रेरित, शहीद भगतसिंह की माता विद्यावती जी के सानिध्य और क्रांतिकारियों के समीपी प्रोफेसर सरल ने व्यक्तिगत प्रयत्नों से 15 महाकाव्यों सहित 124 ग्रंथ लिखे।
17 देशों के बाद अब इन देशों में भी हिंदी संयोजक बनाए गए
डॉ.नवीन चंद्र लोहानी, चीन
वान्या गांछेवा, प्रोफेसर सोफिया विश्वविद्यालय बुलगारिया
डॉ. मौना कौशिक, प्रोफसर बुलगारिया
डॉ. शिवकुमार सिंह, पुर्तगाल
डॉ. संजय अग्निहोत्री, ऑस्ट्रेलिया
कादंबरी आदेश, ट्रिनिडाड टुबैगो
डॉ.संध्या सिंह, सिंगापुर
डॉ.सुधांशु शुक्ला, पोलैंड
डॉ.रोहित कुमार हैप्पी, न्यूजीलैंड
22 प्रदेशों में गठित राज्य इकाई
महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, गोवा, त्रिपुरा, मणिपुर, मिजोरम
‘संगठन को विश्व स्तर पर मजबूती के साथ खड़ा करने पर काम चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राज्य इकाई गठित की जा रही हैं। जल्द ही, जिला स्तरीय इकाइयों का भी गठन होगा। इसके बाद एकजुट होकर हिंदी सेवा में जुटना है। अगले रविवार को समिति की ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय बैठक होनी है’
-डॉ.रवींद्र शुक्ल, अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष हिंदी साहित्य भारती